ओडेसा । यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से रवाना हुए कमर्शियल जहाज एमवी गोल्डन लियो पर हुए रूसी मिसाइल हमले में चार भारतीय नागरिकों की मौत हो गई। 17 सदस्यीय चालक दल वाले इस जहाज पर 5 भारतीय सवार थे। इस भीषण हमले में कुल 10 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। भारत सरकार ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए स्थिति पर गहरी नजर बनाए रखने और प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। नौवहन निदेशालय के नियमों के अनुसार, यदि किसी भारतीय नाविक की ड्यूटी के दौरान मौत हो जाती है, तो उसके परिवार को डेथ ऑन बोर्ड बेनिफिट स्कीम के तहत 6 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह योजना सीफेयरर वेलफेयर फंड सोसाइटी द्वारा संचालित होती है। मुआवजे की यह राशि इस वर्ष जनवरी में बढ़ाकर 6 लाख रुपये की गई थी, जो इससे पहले 4 लाख रुपये थी। इसके अलावा, भारतीय शिपिंग कंपनियों के जहाजों पर तैनात नाविकों के परिजनों को 2 लाख रुपये की अतिरिक्त अनुग्रह राशि भी दी जाती है।
यह मुआवजा पाने के लिए नाविक की नियुक्ति नियमानुसार होना अनिवार्य है। भारतीय जहाजों के लिए सीडीसी लाइसेंस जरूरी है, जबकि विदेशी झंडे वाले जहाजों पर तैनात भारतीय नाविकों की नियुक्ति रिक्रूटमेंट एंड प्लेसमेंट सर्विस लाइसेंस (आरपीएसएल) प्राप्त कंपनी के माध्यम से ही होनी चाहिए। बिना आरपीएसएल के विदेशी जहाज पर जाना गैरकानूनी माना जाता है। आरपीएसएल से पंजीकृत नाविकों को अनिवार्य बीमा, कानूनी सुरक्षा और पार्थिव शरीर को वतन वापस लाने की पूरी सुविधा मिलती है। इसके अतिरिक्त, नौवहन निदेशालय ने मार्च 2026 में हाई-रिस्क क्षेत्रों (जैसे फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और लाल सागर) के लिए एक नई योजना लागू की है। इसके तहत जोखिम भरे इलाकों में भारतीय जहाजों पर तैनात नाविक की मौत होने पर 10 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता दी जाती है। हमले में गंभीर रूप से दिव्यांग होने पर भी 6 लाख रुपये की मदद और कंपनियों द्वारा कराए गए अनिवार्य बीमा का भी लाभ परिजनों को मिलता है। गौरतलब है कि युद्धग्रस्त क्षेत्रों में भारतीय नाविकों की जान जाने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले अमेरिका-ईरान तनाव के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में भी करीब 15 भारतीय नाविक अपनी जान गंवा चुके हैं। इस ताजा हादसे के बाद संघर्ष क्षेत्रों में मारे गए भारतीय नाविकों का आंकड़ा बढ़कर 20 हो गया है। इस दुखद घटना के बीच यह जानना महत्वपूर्ण है कि विदेशी या भारतीय जहाजों पर तैनात नाविकों की मौत पर सरकार और नियम क्या सुरक्षा व मुआवजा प्रदान करते हैं।

