महाकालेश्वर मंदिर के समीप की बेशकीमती शासकीय भूमि

इंदौर

विधायक की फर्म सहित निजी व्यक्तियों को हस्तांतरित, हाई कोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब

इन्दौर महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन के समीप स्थित कीमती शासकीय भूमि जो कि वर्तमान में श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग हेतु उपयोग में ली जा रही है के कथित रूप से निजी व्यक्तियों के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज होने, उसके पश्चात निजी कंपनी को हस्तांतरित कर उनके व्यावसायिक उपयोग के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हाइकोर्ट ने राज्य शासन, राजस्व विभाग, संभागायुक्त उज्जैन, कलेक्टर उज्जैन, नगर निगम उज्जैन सहित संबंधित राजस्व अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। महाकालेश्वर मंदिर के समीप की इस बेशकीमती जमीन को लेकर हाइकोर्ट में यह जनहित याचिका राजेंद्र कुवेल ने लगाई है जिसमें राज्य शासन, राजस्व विभाग, संभागायुक्त उज्जैन, कलेक्टर उज्जैन, नगर निगम उज्जैन सहित संबंधित राजस्व अधिकारियों को पक्षकार बनाया है। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट जयेश गुरनानी के अनुसार महाकालेश्वर मंदिर के समीप की करीब 1.877 हेक्टेयर यह भूमि मूल रूप से वर्ष 1950 के राजस्व अभिलेखों में शासकीय भूमि के तौर पर दर्ज थी। लेकिन बाद के वर्षों में इस भूमि को बिना किसी वैध न्यायिक अथवा सक्षम राजस्व आदेश के निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दिया गया। इसके बाद भूमि के एक हिस्से का हस्तांतरण उथोपया होटल एंड रिसोर्टस प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में किया गया जिसके निदेशक विधायक चिंतामन मालवीय हैं। एडवोकेट गुरनानी के अनुसार याचिका में यह भी बताया गया है कि संबंधित भूमि का एक हिस्सा वर्तमान में हरि फाटक पार्किंग के रूप में उपयोग किया जा रहा है और अब उक्त भूमि के निजी व्यावसायिक उपयोग की स्थिति में श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध पार्किंग व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। कोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर अगस्त में सुनवाई के निर्देश दिए हैं।