विमान की सीलिंग में दरारें
नई दिल्ली । मंगलवार को एअर इंडिया की फुकेट से दिल्ली आ रही फ्लाइट गंभीर टर्बुलेंस की चपेट में आ गई। इस दौरान विमान को हवा में तेज झटके लगे और वह अचानक नीचे आने लगा, जिससे अंदर बैठे यात्रियों और क्रू सदस्यों में हड़कंप मच गया। विमान के भीतर की सीलिंग के पैनल में भी दरारें आ गईं, जो झटकों की भयावहता दिखाता हैं। हालांकि, पायलट ने सूझबूझ से स्थिति को संभाला और फ्लाइट को दिल्ली एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतार लिया।
रिपोर्टों के अनुसार, घटना में विमान में सवार करीब 12 लोग घायल हुए हैं। इसमें कई यात्री और कुछ क्रू सदस्य शामिल हैं, जिन्हें टर्बुलेंस के दौरान झटके लगने या गिरने से चोटें आई हैं। घायलों को तत्काल दिल्ली एयरपोर्ट के मेडिकल सेंटर में जांच और इलाज के लिए भेजा गया। एअर इंडिया ने पहले बताया था कि सभी यात्री और क्रू सुरक्षित हैं, लेकिन बाद में चोटों की खबर सामने आई। घटना के बाद विमान की तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिसमें क्षतिग्रस्त सीलिंग पैनल स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। एअर इंडिया ने इस घटना की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
क्या होता हैं टर्बुलेंस
दरअसल टर्बुलेंस का मतलब है हवा के बहाव का अचानक बदल जाना, जिससे विमान को तेज झटके लगते हैं और वह कुछ समय के लिए ऊपर-नीचे या दाएं-बाएं हिलने लगता है। कभी-कभी विमान कुछ फीट नीचे भी आ जाता है, जिससे यात्रियों को लगता है कि विमान गिर रहा है। हालांकि, ज्यादातर मामलों में ऐसा नहीं होता। यह स्थिति तब बनती है जब मौसम, तेज हवाओं या अन्य कारणों से विमान के पंखों के ऊपर और नीचे से हवा का समान बहाव बिगड़ जाता है, जिससे एयर पॉकेट्स पैदा होते हैं। ये पॉकेट्स ही विमान में झटके पैदा करते हैं।
आधुनिक विमानों को विभिन्न प्रकार के टर्बुलेंस का सामना करने के लिए डिज़ाइन किया जाता है। साथ ही, पायलटों को ऐसी आपातकालीन स्थितियों से सुरक्षित तरीके से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण मिलाता है। आधुनिक तकनीक और बेहतर सुरक्षा प्रणालियों के कारण टर्बुलेंस से विमान हादसे की आशंका काफी कम हो गई है। हालांकि, बेहद गंभीर टर्बुलेंस या अत्यधिक खराब मौसम में दुर्घटना का खतरा पूरी तरह से खत्म नहीं होता, फिर भी आज के विमान ऐसी परिस्थितियों को झेलने में सक्षम होते हैं। इस घटना ने फिर हवाई यात्रा में टर्बुलेंस के संभावित जोखिमों और पायलटों की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर किया है।

