अयोध्या । राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी और आर्थिक अनियमितताओं की जांच अब आरोपियों के करीबियों की संपत्तियों तक पहुंच गई है। अयोध्या पुलिस और एसआईटी ने लखनऊ में आरोपियों और उनके रिश्तेदारों की संपत्तियों का ब्योरा खंगालना शुरू कर दिया है। जांच के दायरे में आठ नामजद आरोपियों के साथ उनके 54 रिश्तेदार और करीबी भी शामिल हैं। इन सभी के नामों की सूची लखनऊ प्रशासन को भेजी गई है।
अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की ओर से जिलाधिकारी को भेजे पत्र में आरोपियों और उनके परिजनों के नाम पिछले दो वर्षों में दर्ज या नामांतरित कृषि-अकृषि भूमि और अन्य अचल संपत्तियों का विवरण मांगा गया है। पत्र के साथ क्षेत्राधिकारी अयोध्या की रिपोर्ट भी भेजी गई है, जिसमें आरोपियों और उनके करीबियों की संपत्तियों की जांच कराने का अनुरोध किया गया है। जांच केवल राजस्व रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहेगी। लखनऊ की तहसीलों के एसडीएम, संबंधित निबंधन कार्यालयों के सब-रजिस्ट्रार, एलडीए, नगर निगम और आवास विकास परिषद के रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि पिछले दो वर्षों में सूची में शामिल लोगों ने जमीन, मकान, फ्लैट या अन्य अचल संपत्ति खरीदी, बेची या अपने नाम दर्ज कराई है या नहीं।
पुलिस अब कथित आर्थिक लेनदेन और संपत्तियों के बीच संभावित संबंध तलाश रही है। राजस्व और निबंधन रिकॉर्ड से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि आरोपियों या उनके करीबियों की संपत्ति में इस दौरान असामान्य बढ़ोतरी हुई या नहीं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि कथित गबन की रकम को अचल संपत्तियों में लगाया गया हो सकता है। मामले में भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज है।
इस बीच आरोपी सुभाष श्रीवास्तव के बंद पेंशन खाते को लेकर भी न्यायालय ने विवेचक सीओ अयोध्या आशुतोष तिवारी को 13 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। कोर्ट ने बैंक खाते में आई धनराशि के सत्यापन से जुड़ी कार्रवाई पूरी कर विस्तृत आख्या पेश करने का निर्देश दिया है। सुभाष श्रीवास्तव की ओर से 18 जुलाई को बंद पेंशन खाते को खुलवाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया था। विवेचक की रिपोर्ट में जेल भेजे जाने के बाद खाते में आई पेंशन राशि को जारी करने की बात कही गई थी। कोर्ट ने बहस के बाद 26 जून के बाद की पेंशन राशि अवमुक्त करने का आदेश दिया था। अब सत्यापन संबंधी रिपोर्ट पर स्पष्टीकरण के लिए विवेचक को अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।

