मैं आर्टिकल 370 को सपोर्ट करती हूं, मैं दिमागी नक्सल हूं

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यह कहते हुए महबूबा मुफ्ती ने किया किरन रिजिजू पर पलटवार
-पीएम मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ बयान पर सियासी घमासान तेज, मनोज झा और पी. चिदंबरम ने भी साधा निशाना
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा प्रधानमंत्री के बयान का समर्थन किए जाने के बाद पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने उन पर पलटवार किया है। महबूबा ने रिजिजू की पोस्ट को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर री-शेयर करते हुए लिखा, “मैं आर्टिकल 370 का समर्थन करती हूं। मैं दिमागी नक्सल हूं।”
दरअसल, किरेन रिजिजू ने प्रधानमंत्री मोदी के बयान को लेकर सोशल मीडिया पर सफाई देते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी ने पूरे विपक्ष को ‘दिमागी नक्सल’ नहीं कहा है। उन्होंने दावा किया कि यह शब्द उन लोगों के लिए इस्तेमाल किया गया है जो माओवादियों का समर्थन करते हैं, भारतीय संविधान को खारिज करते हैं, अलगाववादियों के साथ खड़े होते हैं या अनुच्छेद 370 का समर्थन करते हैं। रिजिजू ने यह भी कहा कि पूर्वोत्तर को भारत से अलग करने के लिए ‘चिकन नेक’ काटने की बात करने वालों को भी इस श्रेणी में रखा जा सकता है।
उनके इसी बयान पर जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने निशाना साधते हुए अपने पिता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर साझा की और रिजिजू के दावे पर व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया दी है।
मनोज झा बोले- राजनीतिक शब्दावली का विस्तार कर रहे पीएम
आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा ने भी प्रधानमंत्री मोदी के बयान पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि ‘अर्बन नक्सल’ से लेकर ‘दिमागी नक्सल’ तक प्रधानमंत्री राजनीतिक शब्दावली का लगातार विस्तार कर रहे हैं। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि यदि ‘अर्बन नक्सल’ पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री है तो ‘दिमागी नक्सल’ निश्चित रूप से पीएचडी होगी। उन्होंने कहा कि इसी रफ्तार से जल्द ही एक पूरे विश्वविद्यालय और नए शब्दकोश की जरूरत पड़ सकती है।
चिदंबरम ने ‘अर्बन नक्सल’ और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ से जोड़ा
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने भी प्रधानमंत्री मोदी के बयान पर आपत्ति जताई। उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ को बीजेपी की पुरानी राजनीतिक शब्दावली का नया रूप बताया। चिदंबरम ने इसे ‘अर्बन नक्सल’, ‘आंदोलनजीवी’ और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ जैसे शब्दों से जोड़ते हुए सवाल किया कि इन शब्दों का इस्तेमाल किन लोगों को निशाना बनाने के लिए किया गया था।
पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर किया था जिक्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए देशवासियों को ऐसे लोगों से सतर्क रहने की अपील की थी, जो उनके अनुसार व्यवस्था में गहराई तक पैठ बना चुके हैं और नीतियों के साथ खिलवाड़ कर समाज के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा था कि देश जंगलों में सक्रिय सशस्त्र नक्सलवाद को समाप्त करने में काफी हद तक सफल रहा है, लेकिन उसके वैचारिक समर्थक अब भी हिंसा और अराजकता फैलाने के अवसर तलाश रहे हैं। उन्होंने नागरिकों से ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करने की अपील की थी। इसी बयान के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए नई शब्दावली गढ़ने का आरोप लगाया है।