इंदौर में सड़क हादसे में एक भी मौत न हो, अब यही लक्ष्य

इंदौर

:: जीरो फैटलिटी डिस्ट्रिक्ट बनाने की तैयारी; न्यायमूर्ति सप्रे बोले- सड़क सुरक्षा केवल वाहन चालकों नहीं, पूरे सिस्टम की जिम्मेदारी ::
इंदौर । सड़क हादसों में एक भी जान न जाए, इसी लक्ष्य के साथ इंदौर को ‘जीरो फैटलिटी डिस्ट्रिक्ट’ बनाने की दिशा में काम होगा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने बुधवार को जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में कहा कि दुर्घटनाओं में होने वाली प्रत्येक मृत्यु को रोकना सड़क सुरक्षा से जुड़े हर अधिकारी और कर्मचारी का प्रमुख ध्येय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल वाहन चालक की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सभी संबंधित विभागों और समाज की साझा जवाबदेही है।
सिटी बस ऑफिस में हुई बैठक में ब्लैक स्पॉट, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों, यातायात व्यवस्था, सड़क इंजीनियरिंग, नियमों के पालन और जनहानि रोकने के उपायों की समीक्षा की गई। न्यायमूर्ति सप्रे ने पुलिस, नगर निगम, लोक निर्माण, परिवहन और स्वास्थ्य विभाग के बीच बेहतर समन्वय के साथ प्रभावी और परिणाममूलक कार्रवाई पर जोर दिया।
:: मप्र के नौ जिले जीरो फैटलिटी अभियान में ::
न्यायमूर्ति सप्रे ने बताया कि पिछले पांच वर्षों के सड़क दुर्घटना आंकड़ों के आधार पर अधिक मृत्यु वाले जिलों को ‘जीरो फैटलिटी डिस्ट्रिक्ट’ के रूप में विकसित करने की पहल की गई है। प्रदेश में पहले धार, खरगोन, रीवा, सतना, सागर और जबलपुर को इसमें शामिल किया गया था। अब इंदौर, भोपाल और उज्जैन को भी अभियान में शामिल किया गया है। इस तरह प्रदेश के नौ जिलों में सड़क हादसों में मौत रोकने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जीरो फैटलिटी केवल घोषणा नहीं है। इसके लिए ऐसा सड़क सुरक्षा तंत्र विकसित करना होगा, जिसमें दुर्घटना होने की स्थिति में भी मृत्यु की आशंका को न्यूनतम किया जा सके।
:: फुटपाथ नहीं तो सरकारी एजेंसी की जवाबदेही ::
न्यायमूर्ति सप्रे ने कहा कि सड़क पर सुरक्षित पैदल चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। जहां फुटपाथ या सुरक्षित पैदल मार्ग उपलब्ध नहीं है और इसके कारण दुर्घटना होती है, वहां संबंधित सरकारी एजेंसी की जवाबदेही तय हो सकती है। उन्होंने सड़क डिजाइन में पैदल यात्रियों के लिए पर्याप्त और सुरक्षित स्थान सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल वाहन चालकों पर नियम लागू करने तक सीमित नहीं है। सड़क का डिजाइन, फुटपाथ, अतिक्रमण, यातायात व्यवस्था और सड़क पर मौजूद अवरोध भी दुर्घटनाओं के कारण बन सकते हैं। सभी विभागों को मिलकर ऐसा रोड सेफ्टी सिस्टम तैयार करना होगा, जिसमें वाहन चालकों के साथ पैदल यात्रियों और अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
:: स्कूल-कॉलेजों में हेलमेट पर सख्ती ::
स्कूल-कॉलेजों में सड़क सुरक्षा अभियान चलाने और दोपहिया से आने वाले विद्यार्थियों के लिए हेलमेट अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए। बिना हेलमेट आने वाले विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं देने की व्यवस्था पर विचार करने को कहा गया। शिक्षक और कर्मचारियों के लिए भी हेलमेट नियम का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
पात्र विद्यार्थियों के ड्राइविंग लाइसेंस के लिए शिविर लगाने, नियमित सड़क सुरक्षा सत्र आयोजित करने और पुलिस अधिकारियों को स्कूल-कॉलेजों में विद्यार्थियों व अभिभावकों से संवाद करने को कहा गया। प्रमाणित गुणवत्ता वाले हेलमेट के इस्तेमाल तथा सड़क सुरक्षा नियमों का बेहतर पालन करने वाले संस्थानों और व्यक्तियों को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल, ट्रैफिक डीसीपी राजेश त्रिपाठी, स्मार्ट सिटी सीईओ अर्थ जैन, अपर कलेक्टर नवजीवन विजय पवार, रिंकेश वैश्य सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।