वॉशिंगटन । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। उन्होंने भारत सरकार द्वारा अवैध अफीम की खेती को रोकने और उसकी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के प्रयासों की सराहना की। यह तारीफ ऐसे समय में आई है जब अमेरिका ने भारत को उन 23 देशों की सूची में फिर से शामिल किया है, जिन्हें प्रमुख अवैध नशीले पदार्थों के उत्पादन या तस्करी वाला देश माना जाता है। ट्रंप ने आधिकारिक बयान में कहा कि वह अवैध अफीम पर लगाम लगाने के भारत के प्रयासों का स्वागत करते हैं और अमेरिका-भारत ड्रग पॉलिसी फ्रेमवर्क के तहत आगे भी सहयोग जारी रखने की उम्मीद करते हैं।
यह सूची अमेरिकी राष्ट्रपति को 15 सितंबर को भेजी गई एक रिपोर्ट का हिस्सा थी, जिसमें अफगानिस्तान, चीन, कोलंबिया, मैक्सिको, पाकिस्तान और म्यांमार जैसे देश भी शामिल हैं। हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि किसी देश का इस सूची में होना अनिवार्य रूप से यह नहीं दर्शाता कि उसकी सरकार नशीले पदार्थों के खिलाफ काम नहीं कर रही है। कई बार भौगोलिक स्थिति, व्यापारिक रास्ते और आर्थिक कारणों से भी कोई देश इस सूची में आ जाता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत उन देशों की श्रेणी में नहीं है जिन्हें अमेरिका ने साफ तौर पर नाकाम बताया है, जैसे अफगानिस्तान, बोलीविया, बर्मा, कोलंबिया और वेनेजुएला। भारत के खिलाफ कोई विशेष असफलता या दंड का ऐलान नहीं किया गया है। दरअसल, भारत और अमेरिका के बीच नशीले पदार्थों पर सहयोग पहले से ही जारी है। जनवरी 2026 में वाशिंगटन में अमेरिका-भारत ड्रग पॉलिसी कार्य समूह की पहली बैठक हुई थी, जिसमें अवैध दवाओं, उनके कच्चे रसायनों और तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने पर जोर दिया गया था। भारत ने तब स्पष्ट किया था कि वह नशीले पदार्थों की तस्करी और दवा उद्योग से जुड़े रसायनों के दुरुपयोग को गंभीरता से लेता है, लेकिन वैध दवा व्यापार को भी जारी रखना चाहता है। भारत में अफीम की खेती पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है, सरकार दवा बनाने के लिए आवश्यक कच्चे माल के लिए कुछ इलाकों में लाइसेंस के साथ अफीम उगाती है। समस्या तब उत्पन्न होती है जब इसके साथ अवैध खेती या तस्करी भी जुड़ जाती है। अमेरिका का ताजा बयान इन्हीं अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के भारतीय प्रयासों की सराहना करता है। अमेरिका के लिए फेंटानिल जैसी सिंथेटिक दवाएं और उनके घटक रसायन एक बड़ी राष्ट्रीय समस्या बन चुके हैं, और वह भारत जैसे प्रमुख दवा उत्पादक देशों से सख्त निगरानी, खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान और आपूर्ति श्रृंखला की जांच चाहता है।

