कोलकाता । पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के दोनों गुटों के बीच पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। दोनों गुट 6 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव में उतरने की तैयारी में हैं, लेकिन संभावना है कि वे तृणमूल कांग्रेस के नाम और मौजूदा चुनाव चिह्न के साथ चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों के बीच पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर खींचतान तेज हो गई है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख बुधवार को थी, इसी दिन चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को पत्र भेजकर दोपहर 3 बजे तक अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने को कहा।
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने बताया कि ऐसे मामलों में फैसला लेने में समय लगता है। अगर चुनाव नजदीक हो तो आयोग आमतौर पर पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को फ्रीज कर देता है। इसके बाद दोनों गुटों को अस्थायी नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने भी इसी संभावना से सहमति जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में आम तौर पर आयोग चुनाव चिह्न को फ्रीज करता है और इसके लिए कई स्तरों पर निर्णय प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।चुनाव आयोग दोनों गुटों से अतिरिक्त दस्तावेज मांग चुका है। आयोग दोनों पक्षों को एक बार फिर सुनवाई के लिए बुला सकता है। रघुनाथगंज के विधायक अखरुज्जमां ने बताया कि आयोग ने अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने के लिए दोपहर 3 बजे तक का समय दिया था और उन्हें यह भी बताया गया कि गुरुवार को एक और सुनवाई हो सकती है। उनके मुताबिक, चुनाव चिह्न का आवंटन 19 सितंबर तक पूरा होना जरूरी है। पिछले शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अगुवाई में चुनाव आयोग की पूरी पीठ ने दोनों गुटों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी। एक गुट का नेतृत्व तृणमूल की संस्थापक और बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कर रही हैं, जबकि दूसरे गुट की अगुवाई बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता रितब्रत बनर्जी कर रहे हैं। दोनों गुटों ने आयोग से अपील की थी कि उपचुनाव से पहले तृणमूल के चुनाव चिह्न और पार्टी की संपत्तियों पर दावों को लेकर फैसला किया जाए। ममता बनर्जी के करीबी एक तृणमूल नेता ने आयोग पर जानबूझकर जटिलताएं पैदा करने का आरोप भी लगाया।

