सावधान राहुल – माहौल तो बन गया है मसखरी नहीं, हैप्पी एंडिंग करना

इंदौर

चेता रिए भिया इंदौरी ठेठ इंदौरी स्टाइल में बकलम आनंद पुरोहित

ऐसा हे भिया राहुल… कि शुरुआती घंटागिरी के बाद.. गूंज का अब माहोल तो बन गिया है, पन अब बाकी तुम्हारे हाथ हे.. कोई मसखरी मत कर जाना.. नि तो इन बाफडो ने जो इत्ती मेनत की उसपे तो पानी फिरेगा ही फिरेगा जवाब नि दे पाएंगे ये बाद में।‌ भई के नाते बितला रिया और यूं ही नि केह रिया तुम्हारा ये भई…. इतिहास जानता है पूरा.. इसलिए चेता रिया पेले सेई…. नि तो बाद में बोलों कि पेले बितलाना था ना। तो भिया पेले ही बितला रिया पूछना मति इतिहास… बस ध्यान रखना।
भोत सईसाट माहोल बना दिया है तुमारे भई लोगों ने यां इन्दौर में…, तुमारी छात्रों की गूंज का… तो मुद्दे की ही बात करना ओर केहना, नि तो तुमारा क्या हे भिया कि…तुम कना क्या क्या बोलते बोलते कना कां निकल जाते हो।… ओर ये बात सामने वाली पाल्टी को भी अच्छी तरे से मालूम, ओर इसका इंतजार तो कर रिये ये सामने बेठे आईटी सेल वाले, तुम मुद्दे से इधर-उधर निकले कि ये धड़ से डाल देंगे डिजाइन…. सम्पट न तुमको पड़ेगी न ये तुमारे अर्रे छरे भई ओन को… डल जाएगी डिजाइन। तो भटकना मति मुद्दे से इधर-उधर, इस शानदार बने माहोल में छात्रों की गूंज को शानदार आगाज के साथ शानदार अंजाम दे… हेप्पी एंडिंग करना, नो मसखरी।
ओ राहुल भिया ये मेरेको क्यों केना पड़ रिया ये भी सभझलों… नि तो फिर खतम…ओके..बाय बाय जैसे विडियो फिर घूमने लगेंगे, भाट्सप फेसबुक पर, क्योंकि जैसेई तुमारी इस छात्रों की गूंज की घोषणा हुई थी तो सामने वाली पाल्टी में तो मस्ती छा गई थी, वो तो तुमको अपना स्टार प्रचारक समझते तुम्हारी हरकतों के कारण, और सई भी हे भिया, तुम भोत शानदार तरीके से अपनी बात पूरी केहते, अच्छे से समझाते, लोग समझने भी लगते…. पर फिर तुम अचानक बात को कां से का ले जाते और…. खतम किसी मसखरे के अंदाज में कर देते.. जिसका सबसे बड़ा उदाहरण ससंद में तुम्हारी आंख मारामारी को याद कर लो, वहां पर भी उस समय इतनी देर तक की गई इतनी गंभीर और दमदार बात को एक झटके में मजाक बना दिया, ऐसे हजारों मामले हैं और इसके चलते तुम्हारे इन्दौर में छात्रों की गूंज की घोषणा होते ही सामने वाली पाल्टी ने तुरंत केह दिया कि तुम्हारे आने से फायदा हमको ही होगा। फड़फड़ा गये तुम्हारे इन्दौर की पाल्टी के अठ्ठे पट्ठे, और शुरू हो गये जवाबी हमले की मूर्खतापूर्ण कार्रवाई करने, ये ही तों चाहिए था उनोको…. ओर इसने उनको पता चल गया कि जैसे तुम… वैसे तुम्हारे पट्ठे…. हालांकि ये बात उनको पेहले से ही पता थीं, पर वो उनकी इस मूर्खतापूर्ण कार्रवाई, जिसे वे जवाबी हमला केह रहें, कन्फर्म हो गई और इस बात को ओर पुख्ता कर गई वो तुम्हारी महाराष्ट्र वाली बई, जिसे अच्छी भली खत्म हो रही प्रेस कांफ्रेंस में बिल्कुल उपर लिखी तुम्हारी स्टाइल में बोल दिया.. घंटा, घंटा फायदा होगा बीजेपी को…. बस प्रेस कॉन्फ्रेंस की बात तो कां की कां गई… घंटा घूमने लगा सोशल साइट्स पर तुमारी छात्रों की गूंज के साथ साथ, वो तो भला हो शासन प्रशासन और इन रूलिंग पार्टी वालों का जिनके द्वारा कार्यक्रम आयोजित करने में लगाएं जा रहे अड़ंगों ( वो भी ये तुमारी पाल्टी वाले केह रिये, मैं नि) ने इनको उलझा लिया, नि तों ये ऐसे ही घंटागिरी करते रेते और तुमारी छात्रों की गूंज में भी घंटे की गूंज ही सुनाई देती। तो भिया राहुल, तुम तो शुक्रिया मनाओ शासन प्रशासन का, की तुम्हारे पट्ठे उनके अड़ंगों में उलझ जबरन घंटागिरी में नि फंसे जैसे कि शुरुआती दौर में ही फंसने की संभावना बन गई थी, और तुमारे इस पिरोग्राम का माहौल बना दिया… तो भिया अब तुम भी ध्यान रखना कि….ऐसे शानदार बने माहोल में.. अपने शानदार पिरोग्राम छात्रों की गूंज का… शानदार तरीके से आगाज कर उसे… शानदार अंजाम देना… कोई मसखरी मत करना बिल्कुल, हैप्पी एंडिंग करना। मेरा काम था एक बार बितलाना तो बितला कर सावधान कर दिया,अब तुम जानो, अगर कुछ मसखरी की तो फिर तैयार रेहना मेरी त्वरित टिप्पणी के लिए, चलता अभी।