मनीषा मंजरी का लेखन उन कहानियों में अपनी जगह बनाता है, जहाँ शब्द केवल कहानी नहीं कहते, बल्कि मन की उन परतों को छूते हैं, जिन्हें हम अक्सर अपने भीतर ही दबाकर रखते हैं। उनकी भाषा में संवेदना है, दृश्यात्मकता है और सबसे बढ़कर मनुष्य के टूटने और फिर संभलने की एक गहरी समझ दिखाई देती है। उनका उपन्यास ‘अनटिल द रेन फेल्ट ब्यूटीफुल अगेन’ इसी लेखकीय संवेदनशीलता का सुंदर उदाहरण है। यह उपन्यास प्रेम को केवल दो लोगों के बीच का आकर्षण बनाकर नहीं देखता, बल्कि उसे आत्मस्वीकृति, सहारे और जीवन की ओर लौटने की प्रक्रिया से जोड़ता है।
यह उपन्यास पढ़ना किसी ऐसी बारिश में भीगने जैसा है, जिसमें बाहर पानी बरस रहा हो और भीतर स्मृतियों का मौसम चल रहा हो। यह प्रेम की सतही चमक से आगे जाकर मनुष्य के भीतर के अँधेरे, अपराधबोध, मानसिक आघात और उससे बाहर निकलने की धीमी-सी कोशिश को सामने रखता है। लेखिका की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे दर्द को शोर नहीं बनातीं। वे उसे धीरे-धीरे पाठक के भीतर उतरने देती हैं।
इस उपन्यास की सबसे उल्लेखनीय बात इसका शीर्षक है- ‘अनटिल द रेन फेल्ट ब्यूटीफुल अगेन’। बारिश यहाँ केवल मौसम नहीं, बल्कि एक प्रतीक बन जाती है। कभी वही बारिश भय की याद दिलाती है, कभी अपराधबोध की, कभी खोए हुए जीवन की और अंततः वही बारिश एक नई शुरुआत का संकेत बन जाती है। शीर्षक इसलिए कहानी से अलग कोई सजावटी पंक्ति नहीं लगता, बल्कि पूरे उपन्यास की आत्मा जैसा महसूस होता है।
आरोही का चरित्र इस उपन्यास की सबसे मजबूत कड़ियों में से एक है। वह शुरुआत में एक जीवंत, घूमने-फिरने वाली, कैमरे में दुनिया को कैद करने वाली लड़की है। हादसे के बाद वही लड़की अपने भीतर सिमट जाती है। पानी उसके लिए प्रकृति नहीं रह जाता, स्मृति बन जाता है। रात, नींद, सपने और आवाजें उसके भीतर लगातार एक ऐसे अतीत को जगाती रहती हैं, जिससे वह भागना चाहती है।
लेखिका ने अपराधबोध के मनोविज्ञान को जिस तरह प्रस्तुत किया है, वह विशेष रूप से ध्यान खींचता है। किसी त्रासदी के बाद व्यक्ति बार-बार अपने भीतर ‘अगर’ और ‘काश’ के प्रश्न पैदा करता है। यही प्रश्न धीरे-धीरे उसके लिए सजा बन जाते हैं। आरोही का सबसे बड़ा संघर्ष बाहर की दुनिया से नहीं, अपने मन की उस अदालत से है, जहाँ वह स्वयं को लगातार दोषी ठहराती है। यहीं उपन्यास एक महत्वपूर्ण बात कहता है- कानून किसी व्यक्ति को निर्दोष घोषित कर सकता है, लेकिन स्वयं को क्षमा करना उससे कहीं कठिन हो सकता है। यह विचार उपन्यास को साधारण प्रेमकथा से ऊपर उठाता है।
रेयांश का चरित्र भी इसी वजह से दिलचस्प है। वह आरोही को बदलने या बचाने का दावा नहीं करता। वह उसके दर्द को अपने प्रेम से मिटा देने की कोशिश नहीं करता। वह बस उसके साथ खड़ा रहता है। यह बात महत्वपूर्ण है, क्योंकि अक्सर प्रेमकथाओं में नायक को उद्धारकर्ता बना दिया जाता है। यहाँ प्रेम का स्वरूप थोड़ा अधिक मानवीय है- साथ चलने का, सुनने का और बिना निर्णय सुनाए किसी के पास बने रहने का।
रेयांश और आरोही का रिश्ता इसलिए प्रभावी लगता है क्योंकि इसमें प्रेम धीरे-धीरे विश्वास में बदलता है। आरोही के लिए किसी के सामने अपने भीतर का भय खोल पाना ही एक बड़ी उपलब्धि है। रेयांश उसे यह समझने में मदद करता है कि वह अपने जीवन की सबसे दर्दनाक घटना भर नहीं है। वह उस घटना से कहीं अधिक बड़ी है।हालाँकि, उपन्यास का सबसे बड़ा भावनात्मक आधार केवल रेयांश नहीं है। डॉ. नायर और वीरा जैसे पात्र यह याद दिलाते हैं कि किसी व्यक्ति का उपचार केवल प्रेम के सहारे नहीं होता। पेशेवर मदद, दोस्ती, परिवार और सबसे बढ़कर स्वयं की इच्छा, इन सभी की अपनी भूमिका है। यह संतुलन उपन्यास को भावुक होने के बावजूद जमीन से जोड़े रखता है।
नीरज का चरित्र उपन्यास में एक अलग तरह की जटिलता लेकर आता है। वह पूरी तरह खलनायक नहीं है और न ही पूरी तरह निर्दोष प्रेमी। उसके माध्यम से लेखिका रिश्तों में आने वाली उन धुंधली परिस्थितियों को सामने रखती हैं, जहाँ सही और गलत के बीच की रेखा उतनी साफ नहीं होती। प्रेम में केवल भावना नहीं होती; परिस्थितियाँ, पेशा, जिम्मेदारियाँ और निर्णय भी होते हैं। आरोही और नीरज का संबंध इसी जटिलता को सामने लाता है।
उपन्यास की एक और खूबी यह है कि इसमें क्षमा को बहुत सहज लेकिन गहरे ढंग से देखा गया है। किसी दूसरे को क्षमा करना और स्वयं को क्षमा करना दो अलग यात्राएँ हैं। आरोही जब अपने अतीत की ओर देखना सीखती है, तो उसे यह समझ आने लगता है कि किसी घटना का परिणाम हमेशा किसी एक व्यक्ति की गलती नहीं होता। कभी-कभी हम किसी ऐसी चीज के लिए स्वयं को दंड देते रहते हैं, जिसे बदलने की शक्ति हमारे हाथ में थी ही नहीं।यही आत्मक्षमा इस उपन्यास की असली मंजिल है।
लेखिका का भाषा-संसार भी इस भावभूमि के अनुकूल है। बारिश, पानी, सड़कें, यात्राएँ, कैमरा, आईना और हवाई टिकट जैसे छोटे-छोटे बिंब उपन्यास में प्रतीकात्मक अर्थ ग्रहण करते जाते हैं। विशेष रूप से कैमरा और यात्रा का इस्तेमाल सुंदर है। कैमरा उस पुराने जीवन की याद है, जिसमें आरोही दुनिया को देखने निकलती थी, जबकि यात्रा उसके उस भविष्य का संकेत बनती है, जहाँ वह फिर से आगे बढ़ना चाहती है।
उपन्यास का एक सुंदर पक्ष यह भी है कि यह उपचार, यानी मन के धीरे-धीरे स्वस्थ होने की प्रक्रिया, को किसी जादुई घटना की तरह प्रस्तुत नहीं करता। प्रेम मिल जाने के बाद सारी समस्याएँ समाप्त नहीं हो जातीं। आरोही को अब भी कठिन दिन मिलते हैं। अतीत पूरी तरह मिटता नहीं। लेकिन उसके साथ उसका रिश्ता बदलने लगता है। यही उपचार की अधिक वास्तविक तस्वीर है- घाव गायब नहीं होता, मगर उसका दर्द धीरे-धीरे कम हो सकता है।
कहीं-कहीं उपन्यास की भावुकता थोड़ी अधिक महसूस होती है और कुछ प्रसंगों में पाठक को घटनाओं से पहले ही भावनात्मक दिशा का अंदाजा हो जाता है। लेकिन यह इसकी संवेदनात्मक प्रकृति का हिस्सा भी है। यह उपन्यास चौंकाने से अधिक महसूस कराने की कोशिश करता है। इसका उद्देश्य पाठक को किसी रहस्य के अंतिम उत्तर तक दौड़ाना नहीं, बल्कि पात्र के मन के भीतर कुछ देर ठहराना है। और शायद यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।
‘अनटिल द रेन फेल्ट ब्यूटीफुल अगेन’ अंततः प्रेम की कहानी से अधिक अपने आप तक लौटने की कहानी है। यह कहता है कि जीवन में कुछ घटनाएँ ऐसी होती हैं, जिन्हें हम बदल नहीं सकते, लेकिन उनके बाद अपने जीवन का अर्थ जरूर बदल सकते हैं। आरोही की यात्रा में बारिश सबसे सुंदर प्रतीक बनकर उभरती है। वही बारिश जो कभी भय थी, धीरे-धीरे स्मृति बनती है और अंततः जीवन की खूबसूरती का हिस्सा। उपन्यास हमें यह नहीं कहता कि तूफान कभी आएँगे ही नहीं। वह बस इतना कहता है कि हर बारिश तूफान नहीं होती। कभी-कभी जिंदगी हमें उसी जगह वापस ले जाती है, जहाँ से हम सबसे ज्यादा डरते थे, ताकि हम इस बार वहाँ अपने डर के साथ खड़े हो सकें। और शायद उपचार का अर्थ भी यही है। अतीत को मिटा देना नहीं। उसकी तरफ देखकर यह कह पाना, “हाँ, यह मेरे साथ हुआ था।
लेकिन मेरी पूरी जिंदगी सिर्फ यही नहीं है।”
मनीषा मंजरी का यह उपन्यास इसी एहसास को बहुत कोमलता से पाठक तक पहुँचाता है। प्रेम यहाँ मंजिल नहीं, रास्ते का एक सहारा है। असली मंजिल है स्वयं को फिर से स्वीकार करना। और अंत में बारिश सचमुच खूबसूरत लगने लगती है। बारिश वही रहती है। आसमान वही रहता है। पानी वही रहता है। बस देखने वाली आँखें बदल जाती हैं और शायद यही ‘अनटिल द रेन फेल्ट ब्यूटीफुल अगेन’ की सबसे खूबसूरत बात है।
समीक्षक: नृपेंद्र अभिषेक नृप
पुस्तक: अनटिल द रेन फेल्ट ब्यूटीफुल अगेन
लेखिका: मनीषा मंजरी
प्रकाशन: सहित्यपिडिया
मूल्य: 300 रुपये

