आज से गूंजेंगे लता के सदाबहार गीत, कल शांतनु मोइत्रा को मिलेगा लता मंगेशकर सम्मान

इंदौर

:: लता मंगेशकर सभागार में दो दिवसीय आयोजन; इंदौर के 10 गायक सजाएंगे पहली शाम, सम्मान के बाद सचेत-परंपरा की संगीत संध्या ::
इंदौर । लता मंगेशकर की जन्मभूमि इंदौर में रविवार से दो दिवसीय राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान अलंकरण समारोह एवं संगीत संध्या शुरू होगी। लता मंगेशकर सभागार में पहले दिन ‘अमर लता, हमारी लता’ कार्यक्रम में शहर के 10 गायक उनके सदाबहार गीतों को स्वर देंगे। सोमवार को संगीत निर्देशक शांतनु मोइत्रा को राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान-2026 से अलंकृत किया जाएगा। इसके बाद सचेत-परंपरा की संगीत संध्या होगी।
संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित दोनों कार्यक्रम शाम 7 बजे शुरू होंगे। रविवार को अभय आहूजा, विवेक भारद्वाज, संजोत बरोट, पद्मा शुक्ला, सुषमा राव, सिद्धार्थ दुबे, वैशाली चौहान, मुस्कान चौहान, सौम्या सिन्हा और दीपिका पुरोहित प्रस्तुति देंगे। दोनों कार्यक्रमों में प्रवेश निशुल्क रहेगा।
:: शांतनु मोइत्रा को पांच लाख की करमुक्त राशि ::
28 सितंबर को होने वाले अलंकरण समारोह में शांतनु मोइत्रा को राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान-2026 के साथ पांच लाख रुपये की करमुक्त सम्मान राशि और प्रशस्ति पट्टिका प्रदान की जाएगी। इसके बाद सचेत-परंपरा संगीत प्रस्तुति देंगे।
:: 1984 में स्थापित हुआ था सम्मान ::
मध्यप्रदेश शासन ने सुगम संगीत में कलात्मक श्रेष्ठता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से वर्ष 1984 में राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान स्थापित किया था। यह सम्मान बारी-बारी से संगीत रचना और गायन के क्षेत्र में दिया जाता है। अब तक 42 विभूतियां इससे सम्मानित हो चुकी हैं। पिछले समारोह में वर्ष 2024 के लिए संगीत निर्देशन के क्षेत्र में शंकर-एहसान-लॉय और वर्ष 2025 के लिए पार्श्व गायन के क्षेत्र में सोनू निगम को सम्मानित किया गया था।
:: ‘परिणीता’ से ‘12वीं फेल’ तक मोइत्रा का संगीत ::
शांतनु मोइत्रा ने ‘परिणीता’, ‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी’, ‘लगे रहो मुन्नाभाई’, ‘3 इडियट्स’, ‘मद्रास कैफे’, ‘पीकू’, ‘अक्टूबर’ और ‘12वीं फेल’ जैसी फिल्मों में संगीत दिया है। तेलुगु फिल्म ‘ना बंगारू तल्लि’ के लिए उन्हें वर्ष 2014 में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला था।
इंदौर में जन्मीं लता मंगेशकर के नाम पर स्थापित यह सम्मान समारोह उनकी संगीत विरासत को स्मरण करने और सुगम संगीत के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान को सम्मानित करने की परंपरा को आगे बढ़ाता है।