संसदीय समितियों में टीएमसी को अध्यक्षता नहीं, संसद को बनाया जा रहा काली कोठी

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-डेरेक ओ’ब्रायन का बयान, राज्यसभा सभापति को पत्र लिखकर उठाए सवाल
नई दिल्ली,(ईएमएस)। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने वर्ष 2026-27 के लिए विभाग-संबंधी संसदीय स्थायी समितियों के पुनर्गठन में अपने किसी भी सांसद को अध्यक्षता नहीं दिए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी के राज्यसभा नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को पत्र लिखकर इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद को एक गहरी, काली कोठी बनाया जा रहा है।
ओ’ब्रायन ने पत्र में कहा कि राज्यसभा में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है, जबकि कांग्रेस के बाद तृणमूल कांग्रेस तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है। इसके बावजूद पार्टी के किसी सांसद को आठ समितियों में से किसी की भी अध्यक्षता नहीं सौंपी गई। उन्होंने कहा कि टीएमसी के पास 2024-25 और 2025-26 में समितियों की अध्यक्षता थी, लेकिन अब यह जिम्मेदारी उससे वापस ले ली गई है। उन्होंने कहा कि 2019 में भी राज्यसभा में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद टीएमसी को समितियों की अध्यक्षता से वंचित रखा गया था। बाद में इस स्थिति को सुधारा गया, लेकिन अब फिर वही परिस्थिति बन गई है।
टीएमसी नेता ने संसदीय समितियों के पास भेजे जाने वाले विधेयकों की संख्या में गिरावट का मुद्दा भी उठाया। उनके अनुसार, 2004 से 2009 के बीच हर 10 में से छह विधेयक समितियों के पास विचार के लिए भेजे गए थे, जबकि 2019 से 2024 के बीच यह संख्या घटकर दो रह गई। उन्होंने अध्यादेशों की बढ़ती संख्या और संसद के बैठक दिवसों में कमी का भी उल्लेख किया। साथ ही, 2019 से लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद खाली रहने पर सवाल उठाया।
गौरतलब है कि राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा स्थायी समितियों का पुनर्गठन किए जाने के बाद टीएमसी ने दो महत्वपूर्ण संसदीय समितियों की अध्यक्षता गंवा दी है।