यूएई में फांसी, गला काटने का रिवाज नहीं, कई एजेंसियां कर रहीं पूछताछ
दुबई । फ्लाईदुबई के विमान में पायलट पर हमले की जांच जैसे-जैसे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। ओमान का रहने वाला आरोपी पायलट हमाम अल-हम्मामी ने विमान में कुल्हाड़ी से साथी पायलट स्मित मच्छर पर हमला कर दिया था। कुछ यात्रियों ने उसे पकड़ लिया था जिसकी जांच यूएई में चल रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक यूएई आरोपी पायलट मौत की सजा दे सकता है। जांच में सामने आए दावों के मुताबिक अल-हम्मामी ने खुद बताया कि विमान को बेन गुरियन एयरपोर्ट से टकराना उसका ‘सपना’ था। उसने इजराइल जाने वाली एयरलाइनों के बारे में जानकारी जुटाई और इसी वजह से फ्लाईदुबई में नौकरी हासिल करने की कोशिश की। अगर यूएई उसे मौत की सजा देता है तो कानून के मुताबिक उसे फायरिंग स्क्वाड के जरिए मौत दी जाएगी। यूएई में फांसी या सऊदी अरब की तरह लोगों के सामने गला काटने का रिवाज नहीं है। 9 लोग एक कमरे में आरोपी को गोली से मारते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक अल-हम्मामी करीब 8 महीने से फ्लाईदुबई के साथ काम कर रहा था। जांचकर्ताओं के मुताबिक उसने बताया कि उसने इजराइल जाने वाली एयरलाइनों की जानकारी जुटाई थी, उसका मकसद ऐसी एयरलाइन में नौकरी हासिल करना था, जिससे वह इजराइल जाने वाली फ्लाइट तक पहुंच सके। पूछताछ में हम्मामी ने बताया कि नौकरी मिलने से पहले ही उसने इस पूरे ऑपरेशन की प्लानिंग कर ली थी। जांचकर्ताओं का मानना है कि वह किसी आतंकी संगठन के आदेश पर नहीं, बल्कि अकेले ही यह योजना बना रहा था। इसकी जांच जारी है।
जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि अल-हम्मामी को इजराइल जाने वाली फ्लाइट में को-पायलट के तौर पर काम करने की मंजूरी कैसे मिली। दरअसल इजराइल और ओमान के बीच राजनयिक संबंध नहीं हैं। इसी वजह से फ्लाइट के पायलट और यात्रियों की जांच को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, लेकिन जांच से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि यह संभव है कि हमाम के पास दोहरी नागरिकता हो।
यूएई में मौत की सजा का कानूनी तरीका फायरिंग स्क्वाड है। फांसी या सार्वजनिक तौर पर सजा यहां नहीं दी जाती है। मौत की सजा पर अमल से पहले अदालतों में अपील की प्रक्रिया पूरी होती है और इसके बाद यूएई के शासक या संघीय मामलों में राष्ट्रपति की लिखित मंजूरी जरूरी होती है। इसके बाद जेल के एक हिस्से में दोषी को ले जाया जाता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक फायरिंग स्क्वाड में आम तौर पर 9 लोग होते हैं। इन सभी को बंदूक दी जाती है। ज्यादातर बंदूकों में असली गोलियां होती हैं, लेकिन कम से कम 1 बंदूक या उससे ज्यादा ऐसी होती हैं, जिसमें गोली नहीं होती। ऐसा इसलिए ताकि जब एकसाथ गोली चले तो किसी को यह न पता चल सके कि आखिर वह गोलियां किसने चलाई, जिससे मौत हुई। हत्या के मामलों में पीड़ित परिवार के पास सजा की मांग, माफी या ब्लड मनी लेकर मामला खत्म करने का विकल्प भी हो सकता है।

