नई दिल्ली । शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व मां दुर्गा की आराधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष, यह पर्व 11 अक्टूबर से प्रारंभ होकर नौ दिनों तक चलेगा। इन दिनों भक्त अपनी श्रद्धा और भक्ति के अनुसार व्रत रखते हैं, जिसमें खानपान का विशेष ध्यान रखा जाता है। आम दिनों में खाए जाने वाले कई खाद्य पदार्थ इन दिनों वर्जित होते हैं, जबकि कुछ विशेष अनाजों, फलों और डेयरी उत्पादों का सेवन किया जाता है। जो भक्त नौ दिनों का व्रत रखने की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि इस दौरान किन खाद्य पदार्थों का सेवन करें और किन पद्रार्थों से परहेज़ करें। नवरात्रि व्रत में आमतौर पर हल्का और सात्विक भोजन करने की परंपरा है। ताजे फल ऊर्जा और हाइड्रेशन दोनों प्रदान करते हैं, जैसे केला, सेब, पपीता, संतरा और अनार इसमें शामिल है। दूध, दही, पनीर और घी जैसे डेयरी उत्पाद भी व्रत का अहम हिस्सा हैं, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखते हैं।
कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा और साम के चावल व्रत के दौरान खाए जाने वाले प्रमुख खाद्य पदार्थ हैं, जिससे रोटी, चीला या खिचड़ी बनाई जा सकती है। साबूदाना से बनी खिचड़ी, खीर और वड़ा भी काफी लोकप्रिय विकल्प हैं। आलू और शकरकंद भी व्रत की थाली में शामिल होते हैं, वहीं बादाम, अखरोट और काजू जैसे मेवा सीमित मात्रा में ऊर्जा प्रदान करते हैं। नमक के लिए सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग होता है। व्रत के दौरान प्याज, लहसुन, गेहूं, चावल, दाल और सामान्य अनाज का सेवन वर्जित होता है। मांसाहारी भोजन, शराब और अन्य नशीले पदार्थों से भी पूर्णतः दूरी बनाई जाती है। इसके अलावा, बहुत ज्यादा तला-भुना या अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से भी परहेज़ करना चाहिए। हालांकि, नवरात्रि का व्रत सिर्फ खानपान तक सीमित नहीं है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह मन और व्यवहार में संयम बरतने का भी समय है। भक्त मां दुर्गा का ध्यान करते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और क्रोध, झूठ, नकारात्मक विचारों से दूर रहने का प्रयास करते हैं। इस अवधि में ब्रह्मचर्य का पालन करने और आध्यात्मिक शुद्धि पर ज़ोर दिया जाता है।

