वांगचुक की चेतावनी: शांतिपूर्ण प्रदर्शन दबाने पर होंगे गंभीर परिणाम

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नेपाल-बांग्लादेश का दिया उदाहरण
मुंबई । लद्दाख के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने हाल ही में मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में सरकारों को चेताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को दबाने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे देशों में देखे गए उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन जनता की शिकायतें समझने और नीतियों में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण जरिया होते हैं।
वांगचुक ने भारत में प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थानों और अनावश्यक अनुमति प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए। उनके मुताबिक, लोगों को अपनी बात रखने के लिए जटिल कानूनी प्रक्रियाओं में उलझना नहीं चाहिए। उन्होंने अर्धसैनिक बलों की तैनाती पर भी चिंता जताई, यह कहते हुए कि इन बलों का इस्तेमाल आंतरिक विरोध प्रदर्शनों को संभालने के बजाय देश की सीमाओं की सुरक्षा पर केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि सर्दियों में सुरक्षाबलों की तैनाती बदलने पर चीन लद्दाख से सटे इलाकों में धीरे-धीरे आगे बढ़ता है। उन्होंने सुझाव दिया कि गृह मंत्रालय को सीमाओं की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए और अर्धसैनिक बलों को रक्षा मंत्रालय के तहत रखा जाना चाहिए। लद्दाख के शासन में स्थानीय लोगों की भागीदारी की मांग उठाते हुए, सोनम वांगचुक ने कहा कि किसी भी क्षेत्र के भविष्य से जुड़े निर्णयों में वहां के निवासियों या उनके प्रतिनिधियों की आवाज अहम होनी चाहिए, क्योंकि वे अपनी जमीन और पर्यावरण की विशिष्ट परिस्थितियों को बेहतर समझते हैं। उनके अनुसार, 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद लद्दाख का प्रशासन दूर बैठे अधिकारियों द्वारा संचालित होने लगा, जो क्षेत्र की विशिष्ट पारिस्थितिकी और स्थानीय जरूरतों को पूरी गहराई से नहीं समझ सकते। वांगचुक ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन को एक संवैधानिक अधिकार बताया और कहा कि अनुमति की व्यवस्था केवल प्रशासन को कार्यक्रम की जानकारी देने के लिए होनी चाहिए। उन्होंने यह भी जोर दिया कि संदेश देने वाले व्यक्ति को नहीं, बल्कि उसके संदेश को सुना जाना चाहिए। उनका यह बयान तब आया है जब वह स्वयं नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल हो चुके हैं और सितंबर 2023 में लद्दाख में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिए गए थे। उन्हें मार्च 2024 में रिहा किया गया था। सोनम वांगचुक के ताजा बयान ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और सरकार की जवाबदेही को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।