क्वाड देशों का आर्थिक सुरक्षा पर जोर, अहम खनिजों और एआई में बढ़ाएंगे सहयोग

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-बैठक में वैश्विक स्थिरता और समृद्धि के लिए आर्थिक सुरक्षा को अपरिहार्य बताया
वाशिंगटन । भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों ने अटलांटा में हुई बैठक में अहम खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने, एआई में सहयोग बढ़ाने और समुद्री सुरक्षा को प्राथमिकता देने पर सहमति व्यक्त की है। विगत 31 अक्टूबर को संपन्न हुई इस बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में वैश्विक स्थिरता और समृद्धि के लिए आर्थिक सुरक्षा को अपरिहार्य बताया गया। चारों देशों ने उन आर्थिक दबावों, मनमाने निर्यात प्रतिबंधों और बाजार को विकृत करने वाली नीतियों पर चिंता जताई, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित कर सकते हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक क्वाड के अहम खनिज पहल के तहत, सदस्य देश इलेक्ट्रॉनिक कचरे और कबाड़ से खनिजों को पुनः प्राप्त करने, प्रसंस्करण संयंत्रों के विकास और वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण पर काम करेंगे। अमेरिका ने भारत और आसियान देशों में ऐसी सुविधाओं के लिए 1 करोड़ डॉलर की सहायता देने की प्रतिबद्धता जताई है। इसका मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी और सेमीकंडक्टर जैसे अहम उद्योगों के लिए आवश्यक खनिजों पर किसी एक आपूर्तिकर्ता पर निर्भरता कम करना है। एआई क्षेत्र में भी क्वाड ने बड़ी पहल की है, जिसके तहत हिंद-प्रशांत में भरोसेमंद एआई तकनीक तक पहुंच बढ़ाने के लिए 8.5 करोड़ डॉलर से अधिक की तकनीकी और वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसके लिए क्वाड एसआई एक्सेलेरेटर का उपयोग किया जाएगा।
बैठक में समुद्री सुरक्षा को आर्थिक समृद्धि से जोड़ते हुए होर्मुज स्ट्रेट, लाल सागर और बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट जैसे अहम मार्गों पर नौवहन की स्वतंत्रता और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने पर जोर दिया। संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय के अनुरूप समुद्री मार्गों पर किसी भी प्रकार के अवरोध या टोल के बिना आवागमन को सुनिश्चित करने की बात भी कही गई।
भारत की समुद्री भूमिका को दर्शाते हुए चेन्नई से पर्थ तक क्वाड की दूसरी समुद्री पर्यवेक्षक यात्रा का भी उल्लेख किया। 2027 में सी ड्रैगन अभ्यास के दौरान चारों देश अपना पहला संयुक्त अभ्यास करने की तैयारी में हैं, साथ ही समुद्री क्षेत्र जागरूकता पर एक संगोष्ठी की भी योजना है। डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए सुरक्षित और तेज समुद्री डेटा केबल नेटवर्क विकसित करने पर सहमति बनी। सेमीकंडक्टर और एआई हार्डवेयर की आपूर्ति श्रृंखला में कमजोर कड़ियों की पहचान के साथ-साथ 5जी, 6जी और ओपन आरएएन जैसी तकनीकों में भरोसेमंद सहयोग बढ़ाने की योजना है।
रिपोर्ट के मुताबिक क्वाड देशों ने साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी के बढ़ते नेटवर्क पर भी चिंता व्यक्त की। संयुक्त विज्ञप्ति में कहा गया कि संगठित आपराधिक गिरोह लोगों की तस्करी कर उन्हें जबरन ऑनलाइन धोखाधड़ी में शामिल करते हैं। ऐसे नेटवर्क को खत्म करने और उनके संचालकों को जवाबदेह ठहराने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। आपदा प्रबंधन में भारत की भूमिका को विशेष रूप से सराहा गया। 26 अगस्त को नेपाल में आई अचानक बाढ़ में बचाव अभियान में भारत की अग्रणी भूमिका को रेखांकित किया। नवंबर में होने वाले वार्षिक संयुक्त मानवीय सहायता और आपदा राहत अभ्यास में अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के पर्यवेक्षक भी हिस्सा लेंगे।