भाजपा का विस्तारक मॉडल भी हुआ टॉय टॉय फिस्स

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 राजस्थान भारतीय जनता पार्टी की पूर्व मुख्यमंत्री और तमाम वरिष्ठ नेताओं ने भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 2018 में विधानसभा चुनाव जीतने के लिए 180 का टारगेट कुल चुनावी फॉर्मूलो में से एक विस्तारक मॉडल पर भी भरोसा किया जा रहा था पर विपक्ष में बैठी कांग्रेस के चुनावी जोड़ बाकी गणित ने भाजपा के एक भी फॉर्मूले को कामयाब नहीं होने दिया।
ज्ञात रहे कि भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की तर्ज पर बीजेपी ने विस्तारक मॉडल को अपनाया संघनिष्ठ और पार्टी की विचारधारा से ओतप्रोत नेताओं को विस्तारक का जिम्मा सौपा गया करीब 170 दीर्घकालीन विसतारक बनायें गए साथ ही अल्पकालिक विस्तारकों की टीम गठित की गई और इन्हें जीरो ग्राउंड रिपोर्ट लाने क लिए बाकायरा 60-70 हजार रूपये की मोटरबाइक देने के साथ इन्हें खर्चा भी दिया गया करीब 200 विस्तारकों को विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में भेजा गया। चुनाव से पहले करीब 1 साल तक इन्होंने ग्राउंड पर काम किया और शीर्ष नेतृत्व को चुनावी फीड़बैक देने का काम किया। इनके जिम्मे सरकारी योजनाओं को आम जन के बीच प्रचारित करने, गुटबाजी को दूर करने, पार्टी को सशक्त बनाने के काम भी थे। बीजेपी में जब संगठन महामंत्री चंद्रशेखर का युग शुरु हुआ उन्होंने पार्टी के जयपुर मुख्यालय में काम संभालते ही विस्तारक प्रक्रिया पर फोकस किया। अशोक परनामी पहले से ही गंभीर थे लेकिन वह अपने काम को चुनावी तौर पर अमलीजामा पहनाते इससे पहले ही विदा कर दिये गये और मदन लाल सैनी की ताजपोशी हो गई। जाहिर है अमित शाह के ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा करने की जिम्मेदारी नये बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के कंधो पर आ गई। बीजेपी में पहली बार शुरु हुई विस्तारक प्रक्रिया अपनी पहली परीक्षा में उतीर्ण नहीं हो पाई, जाहिर फेल का तमगा लग गया। भाजपा के विस्तारकों के कार्य थे उनमें बूथ अध्यक्ष,बूथ समिति,पेज प्रमुख पर कार्य करना, बूथ में रहने सम्पूर्ण मतदाता की जानकारी करना, खासतौर पर नवमतदाता से सम्पर्क साधना, प्रशिक्षण शिविरों और रचनात्मक कार्यो के आयोजन, बूथ के जातीय समीकरणों की गणना, बूथ में स्थित बस्तियों,कॉलोनियों की रिपोर्ट बनाना, सामाजिक कार्यो के प्रति योगदान निभाना, सरकारी संस्थान कैसे काम कर रहे यह भी जांचना, लोगों को समय पर राशन मिल रहा है या नहीं, बीपीएल की स्थिति और भ्रष्टाचार का पता लगाना, सरकार के विकास काम कैसे हो रहे नजर रखना, संघ निष्ठ व भाजपा के वैचारिक परिवारों की सूची बनाना, बूथ कार्यालय बनाकर सुनवाई करना, चुनावी संरचना के काम को करना, बूथ वार क्या विकास के काम है वो पता करना आदि कार्य थे जिन कार्यो को पूरा करके भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आने का सपना संजोये बैठी थी फिर भी भाजपा का विस्तार मॉडल टॉय टॉय फिस्स हो गया।

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