हैं शहर में कितने नये अमीर,चलो तलाश करें .
किसने,किसने बेचा है ज़मीर ,चलो तलाश करें .
घर से जो निकले काटके,माया के जाल को,
हैं कौन-कौन उनमें से फकीर,चलों तलाश करें.
जीतते हैं कुछ इक नेता,वादाखिलाफ़ी करके,
बन जाते हैं फिर वे क्यों वजीर,चलो तलाश करें.
नहीं रोटियाँ नसीब में नौनिहालों को है,मगर
श्वानों को कहाँ मिलती है खीर,चलो तलाश करें .
तरसते बूंद-बूंद को,यहां बस्तियों में लोग हैं,
नदी में कैद है कहां पे नीर,चलो तलाश करें .
नारी के हक हुकूक पर,बातें तो बहुत होतीं,
हरण होते हैं क्यों उसके चीर,चलो तलाश करें .
हुआ है रक्त-रंजित धर्म ,झूठे धर्म-गुरुओं से ,
समझते कौन हैं इसे,जागीर,चलो तलाश करें .
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बिनोद बेगाना
जमशेदपुर, झारखंड