ओमिक्रोन के नए दलाल

मार्केट सज रहा है। नए दलालों से शहर चहक रहा है। नया वाला कोरोना आ रहा है। कोरोना अपने बच्चे ओमिक्रोन को हवा में लहरा कर अपने साथ भारी मार्केट ला रहा है। सभी भाई लोग सुन लें! जब डॉक्टर नारियल पानी पीने की कहे तो 20 रुपए में बिकने वाला नारियल 200 रुपए में बेचना शुरू कर दीजिए; तभी असली मजा आएगा। जब डॉक्टर कहे विटामिन सी अधिक लें, तो नींबू और आंवले के भाव आसमान में चढ़ा देना। इनके भाव 5 गुना बढ़ाएंगे, तभी मार्केट ऊपर चढ़ाएंगे। मेडिकल धंधेबाजों ने पहले ऑक्सीजन की कमी से बहुत माल पीटा था। दुनियाभर के ऑक्सीजन प्लांट खुल गए। उन्हें खोलने के साथ ही शहर के बेवड़े भाई इन अध-जिंदा ऑक्सीजन प्लांटों में दारू पार्टी करने लग गए। इस तरह से दवाई के साथ दारू का शानदार गठजोड़ हो गया। ऑक्सीजन कंसंट्रेट का तो अभी तक कुछ पता नहीं चला है। जाने यह कौन सी बला है? इसने भी मेडिकल धंधेबाजों को खूब माल लुटाया है! कालाबाजारी करने वाले महान कलाकार अपनी नई-नई ड्रेस पहनकर मार्केट में आ ही जाओ। आपको दवाई, इंजेक्शन, शीशी, गोली आदि की कालाबाजारी करनी है। हे कालाबाजारी बंधुओ! आप जब पैदा हुए थे तब आपने अपना ईमान तो पहले ही बेच दिया था। आपने पहले पेरासिटामोल को रगड़ा। रेमदेसीविर को आसमान में पहुंचाया। डेड बॉडी मांगने के लिए भी आपने खूब रोकड़ा कमाया। कफन-काठी में से भी आपने रोकड़ा कूट ही लिया। इसलिए आपको बारंबार चरण स्पर्श करना चाहता हूं। एंबुलेंस वाले भैया भी ओमिक्रोन बाबू की पूजा कर रहे हैं। एंबुलेंस ढूंढ़ने पर नहीं मिलेगी। 

गिद्ध तो मरने के बाद अपना पेट भरने के लिए लाशों को नोंचता है। वह ठहरा जानवर! हम तो इंसान हैं। हम अपनी तिजोरियां भरने के लिए जिंदा इंसानों को ही तो नोच रहे हैं! यही तो हमारी इंसानियत है! यही तो टाइम है, दो पैसे कमाने का! ना बाप ना मैया! सबसे बड़ा रुपैया! जय हो ओमिक्रोन भैया! किसी भी हॉस्पिटल में जाइए! पॉजिटिव से नेगेटिव और नेगेटिव से पॉजिटिव हो जाने का सर्टिफिकेट ले जाइए। मेडिकल मंडी में खूब मिल रहा है, कोरोना वैक्सीन का सर्टिफिकेट! सड़कों की पटरी पे मिल रही है, मनचाही वैक्सीन! कर्फ्यू लगाया लगाया जा रहा है। पुलिस को भी नई कमाई में बड़ा मजा आ रहा है। ओमिक्रोन का सारा ठीकरा सरकार के माथे फोड़ते रहें। प्रशासन को गालियां बकते रहें। इससे पेट का हाजमा ठीक बना रहता है। दो गज दूरी, मास्क जरूरी, का उपदेश एक दूसरे के ऊपर झाड़ते रहें। बाबा तुलसीदास ने पहले ही कह दिया था, पर उपदेश कुशल बहुतेरे! उपदेश तो हैं, बस तेरे-तेरे! मुझे बैंगन खाना है और दूसरों को बैंगन नहीं खाने के फायदे गिनाना है। नेता लोग तो एकदम चकमा बम हैं। रेला-रेली का झमेला चलाएंगे। कोरोना फ्री होने का डमरु बजाएंगे। जनता को भरी ठंड में कूलर बांटने की झांसेबाजी में उलझाएंगे। जनता भी झांसे में आएगी। ओमिक्रोन के साथ वह भी हवा में उड़ती नजर आएगी। बड़े चकाचक सीन दिखाई दे रहे हैं। सारा मार्केट ऑनलाइन शिफ्ट हो रहा है। ऑनलाइन प्रेम, शादी और तलाक! शमशान के सारे भूतों ने अपने मुंह पर मास्क लगा लिया है। हाथों में सैनिटाइजर मल लिया है। भूत भाईजान नए-नए मुर्दों का मांस नोंचने के लिए अपने नाखूनों को साफ कर रहे हैं। मार्केट में ओमिक्रोन के नए दलाल पैदा हो गए हैं। बधाई हो! 

— रामविलास जांगिड़,18, उत्तम नगर, घूघरा, अजमेर (305023) राजस्थान