प्रभु का आगमन 

श्रीराम को देखकर जनकनंदिनी के

मन का कोना – कोना हर्षाया

भवसागर को पार कराने वाले का

सियाजी की तरह ही हाल हुआ।

वैदेही के मन के कोनों में वीणा के 

तारों की झंकार काफी तेज हुई

राग – रागनियों से उर भरकर

कोयल कूक – सी गुंजायमान हुई।

खुद से खुद ही बातें करती

मंद – मंद हैं मुस्काती

सखियां इस नूतन परिवर्तन को

कुछ भी समझ नहीं पाती।

सतरंगी सपनों को संजोए

पांव बढ़े देवी मंदिर की ओर

देवी के सम्मुख स्वर लहरी उठी

समय रुका, न रहा ओर – छोर।।

श्रीराम के छवि दर्शन से व्याकुल था 

मैथिली कुमारी का चातक मन

माता ने दिया आशीर्वाद जानकी को

तुम्हारे जीवन में होगा प्रभु का आगमन।

आनंद मोहन मिश्र

अरुणाचल प्रदेश

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