पीताम्बर रंग में रंगी धरा….!

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खिले-खिले..सरसों के पीले खेत …!  राह चलतों को आकर्षित करते हैं….!

छाया – ऋतुराज बुड़ावनवाला, खाचरौद (उज्जैन)