:: वित्तीय वर्ष 2025-26 में 8% से अधिक रही राज्य की जीएसडीपी विकास दर, राष्ट्रीय औसत को पीछे छोड़ा ::
इंदौर । अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस के अवसर पर एक्ज़िम बैंक द्वारा इंदौर में मध्य प्रदेश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। ‘वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में एमएसएमई क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना’ थीम पर केंद्रित इस सत्र का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना और उन्हें आसान ट्रेड फाइनेंस उपलब्ध कराना था। इस दौरान यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में मध्य प्रदेश की सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) वृद्धि दर 8% से अधिक रही, जो 7.7% के राष्ट्रीय औसत से आगे है।
उद्घाटन सत्र में एक्ज़िम बैंक के उप प्रबंध निदेशक तरुण शर्मा ने कहा कि वर्तमान में देश के कुल निर्यात में मध्य प्रदेश का योगदान 1.8% है और राज्य 13वें स्थान पर है। उन्होंने लक्ष्य साझा करते हुए कहा कि यदि साल 2030 तक राज्य का निर्यात दोगुना करना है, तो हमें 10.6% की वार्षिक चक्रवृद्धि दर से बढ़ना होगा। अब पारंपरिक बाजारों से आगे बढ़कर नए विदेशी बाजारों तक पहुंचना जरूरी है। इसके लिए उन्होंने फार्मा, रसायन, एग्रो प्रोसेसिंग, रक्षा विनिर्माण और स्पेस टेक जैसे उभरते क्षेत्रों को प्रमुख विकास संवाहक बताया।
एमपीआईडीसी के कार्यकारी निदेशक हिमांशु प्रजापति ने इंदौर-पीथमपुर आर्थिक कॉरिडोर और आईटी पार्कों के विस्तार सहित प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक मॉडल को नए निवेश के लिए मील का पत्थर बताया। वहीं, डीजीएफटी के संयुक्त महानिदेशक अभिषेक शर्मा ने एमएसएमई के लिए निर्यात केंद्र के रूप में जिले विज़न के तहत जिला स्तर से निर्यात बढ़ाकर स्थानीय उद्योगों को नए वैश्विक अवसर देने पर जोर दिया। इसके साथ ही तरुण शर्मा ने बताया कि एक्ज़िम बैंक के ट्रेड असिस्टेंस प्रोग्राम (टैप) के तहत अब तक 2,900 से अधिक ट्रांजैक्शनों के माध्यम से 60 देशों को 4 बिलियन यूएस डॉलर से अधिक का अतिरिक्त निर्यात संभव हुआ है, जिससे म.प्र. के फूड प्रोसेसिंग और फार्मा क्षेत्र को सीधा लाभ मिला है।
पैनल चर्चा में पीथमपुर औद्योगिक संगठन के डॉ. गौतम कोठारी ने कुशल श्रम की उपलब्धता को सराहा, लेकिन उच्च लॉजिस्टिक्स लागत और सीमित रेल कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी बाधाओं को भी सामने रखा। इंडो ग्लोबल एसएमई चैंबर के डॉ. भरत कुलकर्णी ने वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए नवाचार को सबसे अहम बताया। इस पर आईआईटी इंदौर के प्रो. शेख एम. मोबिन और आईआईएम इंदौर के प्रो. डी.एल. सुंदर ने सुझाव दिया कि इन चुनौतियों के स्थायी समाधान के लिए उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच अनुसंधान एवं विकास साझेदारी को तुरंत मजबूत करना होगा। सत्र में डीआईसी के एस.एस. मंडलोई और फिओ के अमित बारेठा ने भी अपने विचार रखे।

