108 फीट ऊंची प्रतिमा को आईआईटी और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की तकनीकी मुहर; 169 किमी प्रति घंटे की हवा में भी मजबूती का सफल परीक्षण ::
ओंकारेश्वर/इंदौर । नर्मदा तट की पवित्र नगरी ओंकारेश्वर में स्थापित आदिगुरु शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची ‘एकात्मता की मूर्ति’ सुरक्षा और मजबूती की हर तकनीकी कसौटी पर खरी उतरी है। ‘एकात्म धाम’ में स्थापित यह बहुधातु प्रतिमा पूरी तरह सुरक्षित, सुदृढ़ और संरचनात्मक रूप से मजबूत पाई गई है। अत्याधुनिक इंजीनियरिंग और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप निर्मित यह प्रतिमा आध्यात्मिक आस्था के साथ भारत की तकनीकी क्षमता का भी प्रतीक बन गई है।
संस्कृति विभाग के ‘आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास’ द्वारा वर्ष 2023 में स्थापित इस भव्य प्रतिमा के निर्माण, अभिकल्पना और सुरक्षा मूल्यांकन में देश-विदेश की प्रतिष्ठित विशेषज्ञ संस्थाओं का तकनीकी सहयोग लिया गया है।
मुख्य अभियंता एवं परियोजना संचालक एकात्मधाम राजीव श्रीवास्तव ने बताया कि ‘एकात्मता की मूर्ति’ का निर्माण मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा देश की अग्रणी निर्माण कंपनी मैसर्स एल एंड टी के माध्यम से कराया गया है। एल एंड टी ने विश्व प्रसिद्ध ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ जैसी वैश्विक परियोजना के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने बताया कि प्रतिमा के कॉस्टिंग कार्य का महत्वपूर्ण दायित्व प्रतिष्ठित कंपनी जेटीक्यू ने निभाया। परियोजना प्रबंधन सलाहकार के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनी मैसर्स माइनहार्ट सिंगापुर ने तकनीकी सेवाएं दीं, जबकि डिजाइन सलाहकार के रूप में मैसर्स सी.पी. कुकरेजा एसोसिएट्स ने योगदान दिया। यह फर्म यशोभूमि, भारत मंडपम् और वल्लभ भवन एनेक्सी जैसी राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं से जुड़ी रही है।
:: आईआईटी की जांच में मजबूत मिली संरचना ::
प्रतिमा के दीर्घकालिक स्थायित्व और संरचनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास और आईआईटी दिल्ली से विस्तृत तकनीकी परीक्षण और परामर्श लिया गया।
आईआईटी मद्रास द्वारा प्रतिमा के मिक्स डिजाइन और भूकंपीय प्रभावों की जांच (सीज्मिक एनालिसिस) की गई। वहीं आईआईटी दिल्ली के तकनीकी आकलन में प्रतिमा की डिजाइन लाइफ 500 वर्ष या उससे अधिक निर्धारित की गई है।
:: सीज्मिक जोन-IV के मानकों पर तैयार डिजाइन ::
ओंकारेश्वर क्षेत्र भले ही सीज्मिक जोन-III में स्थित है, लेकिन प्रतिमा की संरचनात्मक गणनाएं अधिक कठोर सीज्मिक जोन-IV के मानकों के आधार पर की गई हैं।
उच्च भूकंपीय दबाव की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार डिजाइन में प्रतिमा पूरी तरह सुरक्षित पाई गई है।
:: 169 किमी प्रति घंटे की हवा में भी मजबूती ::
प्रतिमा की वायु प्रतिरोध क्षमता की जांच विश्व प्रसिद्ध जर्मन विंड इंजीनियरिंग कंपनी मैसर्स वर्नर सोबेक एजी द्वारा की गई।
विंड टनल एनालिसिस में ओंकारेश्वर क्षेत्र के लिए निर्धारित 140 किमी प्रति घंटे की मानक वायु गति की तुलना में प्रतिमा की गणना 169 किमी प्रति घंटे की तेज हवा को ध्यान में रखकर की गई। परीक्षणों में प्रतिमा की स्थिरता और मजबूती बेहतर पाई गई।
:: ETABS विश्लेषण में भी बेहतर परिणाम ::
विश्वस्तरीय स्ट्रक्चरल सॉफ्टवेयर ETABS के माध्यम से किए गए तकनीकी विश्लेषण में भी प्रतिमा की संरचनात्मक क्षमता उत्कृष्ट पाई गई।
स्वीकृत डिजाइन में अनुमेय स्ट्रेस रेशियो की सीमा 0.85 निर्धारित थी, जबकि वास्तविक विश्लेषण में यह मात्र 0.4 पाया गया। यह आंकड़ा प्रतिमा की अतिरिक्त सुरक्षा क्षमता और मजबूत संरचना को दर्शाता है।
:: एक नजर में तकनीकी मजबूती ::
ऊंचाई: 108 फीट
डिजाइन लाइफ: 500 वर्ष से अधिक
भूकंपीय गणना: सीज्मिक जोन-IV मानक
हवा परीक्षण: 169 किमी प्रति घंटे तक
स्ट्रेस रेशियो: 0.4 (अनुमेय सीमा 0.85 के मुकाबले)
प्रमुख तकनीकी संस्थाएं: आईआईटी मद्रास, आईआईटी दिल्ली, वर्नर सोबेक एजी
तकनीकी विशेषज्ञों और परियोजना अधिकारियों के अनुसार, ‘एकात्मता की मूर्ति’ का पेडेस्टल (आधार संरचना) और मुख्य ढांचा अपने निर्धारित अक्ष पर पूरी मजबूती के साथ स्थिर है।
ओंकारेश्वर की यह विराट प्रतिमा अब केवल आध्यात्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और विश्वस्तरीय इंजीनियरिंग क्षमता का प्रतीक बन चुकी है। नर्मदा तट पर स्थापित यह धरोहर आने वाली कई सदियों तक श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनी रहेगी।

