-खतरनाक सामान की हैंडलिंग पर उठे सवाल
-विशेष ऑडिट में मिलीं खामियां, एक माह में सुधार कर रिपोर्ट पेश के निर्देश
नई दिल्ली । देश की प्रमुख विमानन कंपनी इंडिगो एक बार फिर सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) की जांच के दायरे में आ गई है। इस बार नियामक ने एयरलाइन को खतरनाक सामान (डेंजरस गुड्स) की हैंडलिंग और इंजीनियरिंग स्टोरेज से जुड़े सुरक्षा नियमों के पालन में पाई गई कमियों पर चेतावनी जारी की है। डीजीसीए ने फिलहाल कोई आर्थिक दंड नहीं लगाया है, लेकिन एयरलाइन को एक महीने के भीतर सुधारात्मक कदम उठाकर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
डीजीसीए के विशेष ऑडिट में पाया गया कि कुछ मामलों में खतरनाक सामान के भंडारण और परिवहन से संबंधित निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं तथा स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। जांच के दौरान एयरलाइन ने भी एक ऐसी घटना का उल्लेख किया, जिसमें विमान में भेजे गए खतरनाक सामान से जुड़ी समस्या सामने आई थी। इसके बाद नियामक ने सुरक्षा मानकों के अनुपालन को लेकर सख्त रुख अपनाया।
पहले भी डीजीसीए कर चुका है कार्रवाई
यह पहला अवसर नहीं है जब इंडिगो पर डीजीसीए ने कार्रवाई की हो। जनवरी 2026 में दिसंबर 2025 के दौरान बड़ी संख्या में उड़ानों के रद्द होने और विलंब के मामलों में परिचालन योजना, क्रू प्रबंधन और नियामकीय तैयारियों में गंभीर कमियां मिलने पर एयरलाइन पर 22.20 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड जुर्माना लगाया गया था। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए 50 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी भी मांगी गई थी।
अधिकारियों को भी मिल चुका है कारण बताओ नोटिस
इसके अलावा अक्टूबर 2025 में पायलट प्रशिक्षण और श्रेणी-सी हवाई अड्डों पर परिचालन संबंधी नियमों के उल्लंघन पर इंडिगो पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। वहीं दिसंबर 2025 में उड़ान रद्द होने के संकट के दौरान एयरलाइन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सहित वरिष्ठ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और कंपनी के परिचालन पर विशेष निगरानी रखी गई थी।
नियमों का कडाई से हो पालन
इस संबंध में विषय विशेषज्ञों का मानना है, कि विमानन क्षेत्र में खतरनाक सामान की पहचान, पैकेजिंग और परिवहन से जुड़े नियमों का कड़ाई से पालन यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। डीजीसीए का कहना है कि सभी एयरलाइनों की नियमित निगरानी की जाती है ताकि सुरक्षा मानकों से किसी प्रकार का समझौता न हो और यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहे।

