भोपाल । भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा आयोजित स्वच्छता पखवाड़ा-2026 में एम्स भोपाल ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए देशभर के 36 केंद्रीय स्वास्थ्य संस्थानों के बीच प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल अस्पताल परिसर विकसित करने की दिशा में संस्थान की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
1 से 15 अप्रैल 2026 तक चले इस अभियान के दौरान एम्स भोपाल में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट प्रबंधन और जनजागरूकता से जुड़ी अनेक गतिविधियां आयोजित की गईं। संस्थान परिसर में छह हजार से अधिक पौधे लगाए गए तथा रिड्यूस, रीयूज एंड रीसायकल के सिद्धांत को बढ़ावा देते हुए स्वच्छता शपथ, वृक्षारोपण, सफाई अभियान, हाथों और जल स्वच्छता, प्लास्टिक निषेध तथा थूक निषेध जैसे कार्यक्रम चलाए गए।
अभियान के तहत जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट प्रबंधन, गृह व्यवस्था, रिसाव प्रबंधन, साइबर स्वच्छता और अस्पताल उपकरणों के रखरखाव का प्रशिक्षण भी दिया गया। आसपास के गांवों और बस्तियों में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम, योग सत्र, स्वास्थ्य परीक्षण शिविर, पोस्टर एवं भित्ति चित्र प्रतियोगिता, नुक्कड़ नाटक, श्रमदान और स्वच्छता रैलियों का आयोजन किया गया। अनुपयोगी सामग्री के पुनर्चक्रण और अस्पताल परिसर के रखरखाव पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
यह अभियान कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ प्रो. (डॉ.) माधवानन्द कर के नेतृत्व में संचालित हुआ। उप निदेशक (प्रशासन) श्री संदेश जैन, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विकास गुप्ता तथा अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. राघवेन्द्र कुमार विदुआ के समन्वय में सभी विभागों के चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों और स्वच्छता कर्मियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
एम्स भोपाल ने कहा कि यह उपलब्धि स्वच्छ, हरित एवं स्वस्थ भारत के राष्ट्रीय संकल्प को मजबूत करने और मरीजों को स्वच्छ एवं सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में संस्थान के सतत प्रयासों का परिणाम है।

