भोपाल । मध्यप्रदेश के सिंचाई इतिहास की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल स्लीमनाबाद जल-सुरंग अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को कटनी जिले में देश की सबसे लंबी 11.952 किलोमीटर जल-सुरंग का निरीक्षण करेंगे। इस परियोजना के पूर्ण होने के बाद नर्मदा का जल गुरुत्वाकर्षण प्रणाली के माध्यम से विंध्य क्षेत्र तक पहुंचेगा, जिससे छह जिलों के करीब 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी।
करीब 17 वर्षों की कठिन भू-गर्भीय चुनौतियों के बाद यह परियोजना साकार होने जा रही है। विंध्य पर्वतमाला के भीतर निर्मित यह सुरंग देश की सबसे जटिल इंजीनियरिंग परियोजनाओं में शामिल है। सुरंग के निर्माण के दौरान चट्टानी संरचनाओं, भारी जल रिसाव और भूमिगत गुफाओं जैसी कई तकनीकी बाधाओं का सामना करना पड़ा। अत्याधुनिक जर्मन तकनीक और विशेष ग्राउटिंग प्रणाली की मदद से परियोजना को अंतिम चरण तक पहुंचाया गया।
वर्ष 2008 में स्वीकृत इस परियोजना पर अब तक लगभग 1610.47 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं। परियोजना का 96.66 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि मुख्य सुरंग और ओपन कट नहर का निर्माण शत-प्रतिशत पूरा हो गया है। शेष कार्य भी तेजी से पूरा किया जा रहा है।
यह परियोजना जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना जिलों की कृषि व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाएगी। नर्मदा का जल बिना किसी पंपिंग के प्राकृतिक ढाल के सहारे खेतों तक पहुंचेगा, जिससे सिंचाई लागत घटेगी और किसानों की आय बढ़ने की संभावना है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशन में परियोजना की लगातार समीक्षा और समयबद्ध कार्यान्वयन से इसे गति मिली है। सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक 87 हजार हेक्टेयर से अधिक तथा दिसंबर 2027 तक 1.54 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है। स्लीमनाबाद जल-सुरंग को विंध्य और महाकौशल क्षेत्र के कृषि विकास की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।

