पोस्ट आफिस एफ डी राशि का भुगतान रोका, कोर्ट ने दस दिन में निराकरण का दिया आदेश, आपत्ति शादी के बाद नाम परिवर्तन की

मध्य प्रदेश

इन्दौर | मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस संदीप एन. भट्ट की एकलपीठ ने डाक विभाग द्वारा एफ डी की राशि देने से इंकार करने के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई उपरांत आदेश दिया कि संबंधित अधिकारी दस्तावेजों पर विचार कर 10 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता के दावे पर विधि अनुसार निर्णय लें। याचिकाकर्ता द्वारा याचिका डाक विभाग द्वारा उसके विवाह उपरांत नाम परिवर्तन को आधार बनाकर उसके फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) की राशि देने से इनकार करने के मामले में दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने डाक विभाग को दोबारा सुनवाई कर कानून के अनुरूप फैसला लेने के निर्देश दिए है। याचिका कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि संध्या दरियानी जिनका शादी के पूर्व में नाम निर्मला दरियानी था ने दायर याचिका में कोर्ट को बताया कि टेकचंद दरियानी के नाम से पोस्ट आफिस की एक फिक्स्ड डिपॉजिट में वे विधिवत नामांकित लाभार्थी (नॉमिनी) है। उक्त एफडी की अवधि पूरी होने के बाद उन्होंने भुगतान का दावा किया, लेकिन डाक विभाग ने विवाह के बाद बदले नाम से जुड़े दस्तावेज अस्वीकार कर राशि का भुगतान करने से इंकार कर दिया। जबकि उन्होंने विवाह के बाद नाम परिवर्तन की पूरी वैधानिक प्रक्रिया अपनाते इसके लिए सार्वजनिक सूचना प्रकाशित कराई गई, शपथपत्र, बिजली बिल सहित अन्य दस्तावेज भी प्रस्तुत किए थे। याचिका पर सुनवाई दौरान कोर्ट ने सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह 7 दिन में आदेश की प्रति और संबंधित दस्तावेज सब पोस्टमास्टर के समक्ष प्रस्तुत करें। इसके साथ ही पोस्टमास्टर को दस्तावेज जांच कर 10 दिन में याचिकाकर्ता के दावे पर कानून के अनुसार निर्णय लेने का कोर्ट ने आदेश दिया।