अहिल्योत्सव की शुरुआत कल से, शहर में डेढ़ माह तक चलेगा सांस्कृतिक उत्सव

इंदौर

:: चित्रकला, श्लोक पाठ, भजन, कहानी और लोकनृत्य प्रतियोगिताएं होंगी; 10 सितंबर को निकलेगी भव्य पालकी यात्रा ::
इंदौर । प्रातः स्मरणीय देवी अहिल्याबाई की 231वीं पुण्यतिथि के अवसर पर अहिल्योत्सव समिति द्वारा डेढ़ माह तक चलने वाले सांस्कृतिक एवं रचनात्मक आयोजनों का शुभारंभ रविवार, 26 जुलाई से होगा। उत्सव में विद्यार्थियों, शिक्षकों और कलाकारों की सहभागिता रहेगी। इस दौरान चित्रकला, वक्तृत्व कला, संस्कृत श्लोक पाठ, भजन, कहो कहानी और लोकनृत्य सहित विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। आयोजन का प्रमुख आकर्षण 10 सितंबर को निकलने वाली परंपरागत भव्य पालकी यात्रा होगी।
अहिल्योत्सव समिति की अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, कार्यकारी अध्यक्ष अशोक डागा और मंत्री शरयू वाघमारे ने बताया कि समिति प्रतिवर्ष देवी अहिल्याबाई की स्मृति में सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करती है।
:: चित्रकला प्रतियोगिता से होगा शुभारंभ ::
अहिल्योत्सव कार्यक्रमों की शुरुआत रविवार 26 जुलाई को सुबह 10 बजे आरके डागा स्कूल में चित्रकला प्रतियोगिता से होगी। प्रतियोगिता तीन चरणों में आयोजित की जाएगी।
प्रतियोगिता प्रमुख नीलेश केदारे ने बताया कि विद्यालयीन शिक्षकों के लिए वक्तृत्व कला प्रतियोगिता 6 अगस्त को सुबह 10.30 बजे वैष्णव वाणिज्य महाविद्यालय में होगी। संस्कृत श्लोक पाठ प्रतियोगिता 12 अगस्त को इंदिरा विद्या मंदिर में आयोजित की जाएगी।
खुली भजन प्रतियोगिता 22 और 23 अगस्त को उषा नगर एवं राम मंदिर, परदेशीपुरा में होगी। कहो कहानी प्रतियोगिता 26 अगस्त को तीन स्थानों पर एक साथ आयोजित की जाएगी। लोकनृत्य सहित अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां 1 और 2 सितंबर को माई मंगेशकर सभागृह में होंगी।
:: 250 से अधिक कार्यकर्ता संभालेंगे व्यवस्था ::
आयोजन के मीडिया प्रभारी राम मूंदड़ा और प्रकाश पारवानी ने बताया कि सभी कार्यक्रमों के संचालन के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया गया है। आयोजन की व्यवस्थाओं में 250 से अधिक कार्यकर्ता जिम्मेदारी संभालेंगे।
:: 10 सितंबर को निकलेगी भव्य पालकी यात्रा ::
पालकी यात्रा संयोजक शंकर लालवानी ने बताया कि देवी अहिल्याबाई की 231वीं पुण्यतिथि पर 10 सितंबर को शहर में भव्य पालकी यात्रा निकाली जाएगी। यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, सामाजिक संगठनों और नागरिकों की सहभागिता रहेगी।