आंदोलनों ने सरकारों को झुकने पर मजबूर किया, देश संविधान से चलेगा : सुभाषिनी अली

इंदौर

शैलेंद्र शैली स्मृति व्याख्यानमाला में बोलीं पूर्व सांसद- किसान, मजदूर और छात्र आंदोलनों ने दिखाई लोकतंत्र की ताकत; जेन-जी संघर्ष पर रखे विचार
इंदौर । लोकतंत्र की मजबूती जनभागीदारी और शांतिपूर्ण आंदोलनों से होती है। ऐतिहासिक किसान आंदोलन और वर्तमान छात्र-युवा आंदोलनों ने सरकारों को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार के लिए मजबूर किया है। देश संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर चलेगा। यह बात पूर्व सांसद और माकपा (सीपीएम) पोलित ब्यूरो की पूर्व सदस्य कामरेड सुभाषिनी अली ने रविवार को शैलेंद्र शैली स्मृति व्याख्यानमाला में कही।
अभिनव कला समाज गांधी हॉल में आयोजित व्याख्यानमाला के तहत “आज की दुनिया, भारत और जेन-जी: संघर्ष और संभावनाएं” विषय पर संबोधित करते हुए सुभाषिनी अली ने कहा कि किसान, मजदूर, छात्र और नौजवानों के शांतिपूर्ण संघर्षों ने लोकतंत्र की ताकत को साबित किया है। उन्होंने कहा कि जनता की आवाज सुनना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक किसान आंदोलन और वर्तमान छात्र-युवा आंदोलनों ने यह दिखाया है कि लोकतांत्रिक तरीके से उठाई गई आवाज का असर होता है। जंतर-मंतर सहित विभिन्न स्थानों पर हुए छात्र आंदोलनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जनदबाव के कारण सरकारों को कई बार अपने फैसलों पर पुनर्विचार करना पड़ा है।
सुभाषिनी अली ने कहा कि आंदोलनों के दौरान प्रदर्शनकारियों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें उठाईं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अधिकारों के साथ जिम्मेदारियों और जनभागीदारी का भी महत्व है।
उन्होंने कहा कि मजदूर, किसान, छात्र और नौजवानों की एकजुट आवाज लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करती है। संविधान के अनुरूप चलने वाली व्यवस्था में जनता की भागीदारी महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता लॉयर यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता कामरेड बाबूलाल नागर ने की। सीटू के प्रदेश उपाध्यक्ष कैलाश लिंबोदिया ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन किसान सभा के प्रदेश सचिव अरुण चौहान ने किया, जबकि आभार सीटू के जिला महासचिव सीएल सारावत ने माना।
कार्यक्रम में ट्रेड यूनियन, खेत मजदूर, किसान सभा के कार्यकर्ताओं सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।