:: ISFMG-2026 का शुभारंभ; मंत्री सिलावट बोले- आधुनिक निगरानी तकनीक से घटेंगे संरचनाओं के जोखिम, सुरक्षित विकास को मिलेगी नई दिशा ::
इंदौर । बांधों, पुलों, सुरंगों और जल संरचनाओं की सुरक्षा को लेकर दुनिया के विशेषज्ञ अब इंदौर में जुटे हैं। पहली बार भारत में आयोजित हो रही 12वीं अंतरराष्ट्रीय फील्ड मॉनिटरिंग इन जियोमैकेनिक्स संगोष्ठी (ISFMG-2026) का गुरुवार को होटल रेडिसन में शुभारंभ हुआ। 10 अगस्त तक चलने वाली इस संगोष्ठी में 30 से अधिक देशों के करीब 250 वैज्ञानिक, शोधकर्ता, अभियंता, सरकारी अधिकारी और उद्योग विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं।
जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने संगोष्ठी का शुभारंभ करते हुए कहा कि सुरक्षित और टिकाऊ आधारभूत संरचनाएं विकास की पहली जरूरत हैं। आधुनिक फील्ड मॉनिटरिंग तकनीकों के उपयोग से बांध, पुल, जलाशय, नहरों और अन्य महत्वपूर्ण संरचनाओं में आने वाले खतरों की समय रहते पहचान संभव है। इससे जनसुरक्षा मजबूत होगी और रखरखाव की लागत भी कम की जा सकेगी।
उन्होंने कहा कि ISFMG-2026 केवल तकनीकी चर्चा का मंच नहीं, बल्कि भविष्य की विकास परियोजनाओं को सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। दुनिया के विशेषज्ञ यहां अपने शोध, अनुभव और नवीन तकनीकों को साझा करेंगे, जिनका लाभ देश और प्रदेश की आधारभूत संरचनाओं को मिलेगा।
:: सेंसर तकनीक से पहले ही पता चलेंगे खतरे ::
संगोष्ठी में जियोमैकेनिक्स, भू-तकनीकी जोखिम, सेंसर आधारित निगरानी प्रणाली, आपदा प्रबंधन और टिकाऊ निर्माण तकनीकों पर विशेषज्ञ चर्चा करेंगे। आधुनिक तकनीकों की मदद से जमीन, चट्टानों और निर्माण संरचनाओं के व्यवहार की लगातार निगरानी कर संभावित जोखिमों का पहले ही आकलन किया जा सकेगा।
मंत्री सिलावट ने कहा कि बांध, जलाशय, नहरें, पुल और सुरंगें किसी भी राष्ट्र की प्रगति की आधारशिला होती हैं। इनकी नियमित निगरानी और वैज्ञानिक मूल्यांकन से संरचनाओं की उम्र बढ़ाने के साथ दुर्घटनाओं की आशंका को भी कम किया जा सकता है।
:: मध्यप्रदेश की जल परियोजनाओं को मिलेगा लाभ ::
मंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में नदियों, बांधों और सिंचाई परियोजनाओं का बड़ा नेटवर्क है। ऐसे में इस अंतरराष्ट्रीय मंच से मिलने वाले अनुभव प्रदेश की जल संरचनाओं की सुरक्षा, सिंचाई व्यवस्था, बाढ़ नियंत्रण और आपदा प्रबंधन को और प्रभावी बनाने में मदद करेंगे।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में 47 हजार से अधिक तालाबों और 5,839 अमृत सरोवरों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन का कार्य किया जा रहा है। नर्मदा, ताप्ती और चंबल जैसी प्रमुख नदियों से समृद्ध मध्यप्रदेश में वैज्ञानिक जल प्रबंधन की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है।
:: आईआईटी इंदौर के शोध को मिलेगा वैश्विक मंच ::
मंत्री सिलावट ने कहा कि आईआईटी इंदौर जैसे संस्थानों में हो रहे शोध और नवाचारों को विकास परियोजनाओं तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। सरकार, शिक्षण संस्थानों, अनुसंधान संगठनों और उद्योग जगत के समन्वय से ही सुरक्षित और लंबे समय तक टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा सकता है।
उन्होंने आयोजन के लिए आईआईटी इंदौर की प्रो. नीलिमा सत्यम और उनकी टीम, इंडियन जियोटेक्निकल सोसायटी तथा सहयोगी संस्थाओं को बधाई दी।
:: भारत में पहली बार आयोजन ::
ISFMG-2026 का आयोजन पहली बार भारत में किया जा रहा है। संगोष्ठी में विशेषज्ञ दुनिया में अपनाई जा रही अत्याधुनिक निगरानी प्रणालियों और निर्माण सुरक्षा तकनीकों पर चर्चा करेंगे। इसका उद्देश्य ऐसी तकनीकों को बढ़ावा देना है, जिससे भविष्य की परियोजनाएं अधिक सुरक्षित, मजबूत और टिकाऊ बन सकें।
कार्यक्रम में डॉ. मारवान, डॉ. एंड्रयू रिडली, डॉ. पॉल बारटन, डॉ. अनिल जोसफ, प्रो. नीलिमा और डॉ. ए.पी. सिंह सहित देश-विदेश के विशेषज्ञ मौजूद रहे।

