इतिहास पढ़ें, मदरसों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता

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-मदरसों पर मौर्य की विवादित टिप्पणी को लेकर ओवैसी ने किया पलटवार
नई दिल्ली । ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख एवं सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के मदरसों संबंधी विवादित बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मौर्य को इतिहास का समुचित अध्ययन करना चाहिए और यदि स्वयं अध्ययन संभव न हो तो किसी जानकार से इसके बारे में जानकारी लेनी चाहिए।
दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान ओवैसी ने कहा कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से पहले और उसके दौरान कई मदरसों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ आवाज उठाई थी। उनका दावा था कि स्वतंत्रता आंदोलन में मदरसों की ऐतिहासिक भूमिका रही है और उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े लोगों की स्वतंत्रता आंदोलन में कोई उल्लेखनीय भूमिका नहीं रही। ओवैसी ने कहा कि मदरसों को लेकर दिए जा रहे बयान तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और इस प्रकार की टिप्पणियां समाज में अनावश्यक विवाद पैदा करती हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था पर टिप्पणी करने से पहले उसके ऐतिहासिक और सामाजिक योगदान को समझना आवश्यक है।
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओजेके) में जारी विरोध प्रदर्शनों पर भी ओवैसी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने वहां प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित कार्रवाई और हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों के साथ बल प्रयोग उचित नहीं माना जा सकता। ओवैसी ने यह भी आरोप लगाया कि मदरसों को लेकर दिए जा रहे बयान अन्य राजनीतिक मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने का प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में गंभीर विषयों पर तथ्यात्मक और जिम्मेदार संवाद होना चाहिए, न कि राजनीतिक बयानबाजी।