:: राष्ट्रपति मुर्मु ने प्रदान किया राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार-2025, महेश्वर की कला को मिली नई पहचान ::
इंदौर । खरगोन जिले के बुनकर कमल गौड़ ने महेश्वरी साड़ी की पारंपरिक बुनाई को राष्ट्रीय पहचान दिलाई है। उत्कृष्ट शिल्प कौशल और हथकरघा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार-2025 से सम्मानित किया।
नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में राष्ट्रपति मुर्मु ने कमल गौड़ को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया। समारोह में संत कबीर हथकरघा पुरस्कार और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार प्रदान किए गए। इस अवसर पर भारत की समृद्ध और विविध हथकरघा परंपराओं के सम्मान में चार स्मारक डाक टिकट भी जारी किए गए।
कमल गौड़ को यह पुरस्कार महेश्वरी साड़ी की बारीक बुनाई, पारंपरिक डिजाइनों और इस प्राचीन कला को आगे बढ़ाने में उनके योगदान के लिए दिया गया। उनके सम्मान से महेश्वर की सदियों पुरानी हथकरघा विरासत को देशभर में नई पहचान मिली है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कमल गौड़ को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान महेश्वरी साड़ी की विशिष्ट पहचान, मध्यप्रदेश की समृद्ध हथकरघा परंपरा और प्रदेश के बुनकरों के उत्कृष्ट कला-कौशल का गौरव है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार महेश्वर को टेक्सटाइल टूरिज्म विलेज के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि यहां की ऐतिहासिक हथकरघा परंपरा को नई ऊंचाइयां मिल सकें और बुनकरों को बेहतर अवसर उपलब्ध हों।

