80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू बोलीं

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2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे
नई दिल्ली । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देश को संबोधित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं। नागरिक राष्ट्र के लिए सदैव जागरूक रहें। उन्होंने आगे कहा कि आज का दिन हम विभाजन विभीषिका दिवस के रूप में मनाते हैं। सांप्रदायिक हिंसा की वजह से लाखों को शरणार्थी बनना पड़ा। फिर भी उन्होंने अपनी पहचान नहीं छोड़ी।
राष्ट्रपति ने कहा कि आज का दिन हम विभाजन विभीषिका दिवस के रूप में मनाते हैं। सांप्रदायिक हिंसा की वजह से लाखों को शरणार्थी बनना पड़ा। फिर भी उन्होंने अपनी पहचान नहीं छोड़ी। हमारा संविधान जनभागीदारी पर आधारित है। उस भावना को हमारे देशवासी आगे बढ़ा रहे हैं यह हमारी लोकतंत्र की उपलब्धि है। अब से कुछ ही घंटों बाद, हमारे देश की स्वाधीनता के 80वें वर्ष का शुभारंभ होगा। देश-विदेश में रहने वाले सभी भारतीय यह पर्व उल्लास के साथ मनाते हैं। हमारा तिरंगा हमारी स्वाधीनता का प्रतीक है। इसे हम पूरी शान से फहराते हैं।
देशवासी स्वतंत्र भारत की नियति के निर्माता बने
द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि 15 अगस्त 1947 के दिन भारतमाता पराधीनता की बेडिय़ों से मुक्त हुईं। सभी देशवासी, स्वतंत्र भारत की नियति के निर्माता बने। निष्ठावान विद्यार्थी और शिक्षक, विकास के लिए तत्पर वैज्ञानिक और इंजीनियर, स्वास्थ्य सेवा में कार्यरत डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी, मेहनती श्रमिक और अन्नदाता किसान, अपने प्रयासों से राष्ट्र-निर्माण कर रहे हैं। अन्य क्षेत्रों में सक्रिय, असंख्य देशवासी, तथा संविधान में निहित, मूल कर्तव्यों का पालन करने वाले सभी नागरिक, राष्ट्र-निर्माण में महत्वपूर्ण भागीदार हैं। मैं उन सभी की हृदय से सराहना करती हूं।
सिंधु जल संधि को निलंबित करना राष्ट्रीय हित में
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि न्यायिक व्यवस्था से जुड़े हर व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करे कि संसाधनों की कमी के कारण किसी को भी न्याय से वंचित न रहना पड़े। आतंकवाद को पनाह देने वाले देश के साथ सिंधु जल संधि को निलंबित करना राष्ट्रीय हित में, खासकर किसानों के लिए, एक निर्णायक कदम है।

पिछले एक दशक में देश ने तेज गति से विकास किया
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि अपनी समृद्ध विरासत और स्वाधीनता संग्राम के आदर्शों को अपनाते हुए हम आधुनिक विकास के मार्ग पर अग्रसर हैं। ‘वयं राष्ट्रे जागृयाम’, यह वेद-वाक्य हमें प्रेरणा देता है कि हम राष्ट्र के लिए सदैव जागरूक रहें। पिछले एक दशक से कुछ अधिक समय में हमारे देश ने तेज गति से समावेशी विकास किया है। विरासत और विकास के समन्वय को प्राथमिकता दी है, तथा विकास में बाधक दशकों पुराने अनेक अवरोधों को दूर किया है।
25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर निकले
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से मुक्ति दिलाने में सफलता मिली है। विश्व की सबसे बड़ी वित्तीय समावेश की योजना प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत लगभग 59 करोड़ खाताधारक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ चुके हैं। उनमें 32 करोड़ से अधिक महिला खाताधारक शामिल हैं। 80 करोड़ लोगों के लिए नि:शुल्क राशन की व्यवस्था द्वारा उनकी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। ‘आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ के तहत 60 करोड़ लोगों को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपए तक की निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है।