नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के यौन उत्पीड़न के मामलों की जांच को उच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है। उन्होंने इस बारे में गठित उच्च-स्तरीय जांच समिति से कहा है कि वे यौन उत्पीड़न के आरोपों पर जल्द से जल्द अपनी अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
यह निर्देश तब आया जब अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में स्वतः संज्ञान लेने की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही महिला छात्रों के साथ पुलिसकर्मियों ने छेड़छाड़ और गलत हरकतें की हैं, इसकी शिकायतें सोशल मीडिया पर भी सामने आई थीं। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने बताया कि इस मामले में एक अलग से रिट याचिका भी दायर की गई थी और गठित उच्च-स्तरीय समिति को इन आरोपों की जांच करने को कहा गया है। सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय उच्च-स्तरीय जांच समिति का गठन किया है। इस समिति में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश शालिंदर कौर, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व पुलिस महानिदेशक एल.आर. बिश्नोई सदस्य के तौर पर शामिल हैं। यह समिति 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कथित ज्यादतियों की जांच कर रही है। छात्र राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) और अन्य परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने के कारण तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।
समिति को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वह लक्षित हिंसा, उत्पीड़न और विशेषकर महिला प्रदर्शनकारियों के साथ छेड़छाड़ की कथित घटनाओं जैसे संवेदनशील मुद्दों पर प्राथमिकता के आधार पर ध्यान केंद्रित करे। सीजेआई ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे मामलों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और समिति के अध्यक्ष को एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने की भी स्वतंत्रता दी गई है, जिनके पास पीड़ित सीधे अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें।

