हक़ दो टूटे हुए लोगों की कहानी है

मनोरंजन

इमरान हाशमी का कहना है कि  जब आप दो घंटे की फिल्म बना रहे होते हैं, तो कहानी को कुछ खास पहलुओं तक सीमित करना पड़ता है, ताकि उसका ड्रामा और इमोशन दर्शकों तक सही तरह पहुँचे। इस केस के कई पहलू रहे हैं, लेकिन ‘हक़’ में हमने इन दो लोगों के बीच की इंसानी और इमोशनल कहानी पर फोकस किया है। यह एक ऐसी शादी है, जो एक खूबसूरत हनीमून फेज़ से शुरू होती है, फिर इसमें अच्छे और बुरे दौर आते हैं, रिश्ता मुश्किल दौर से गुजरता है और आखिरकार उस मोड़ पर पहुँचता है, जो हमेशा मुश्किल होता है- तलाक।

मेरे लिए यह फिल्म असल में दो टूटे हुए लोगों की कहानी है। इस निजी कहानी के साथ एक बड़ा टकराव भी है- एक आदमी उस चीज़ के लिए लड़ रहा है, जिस पर उसका गहरा विश्वास है, वहीं एक महिला अपने गुज़ारे और सम्मान जैसे बुनियादी हक़ के लिए लड़ रही है। 20 सितंबर को रात 8 बजे एंड पिक्चर्स के ज़रिए ‘हक़’ और भी बड़े दर्शक वर्ग तक पहुँचेगी।