50 शिक्षकों ने लिया 120 घंटे का प्रशिक्षण, 5 हजार से अधिक विद्यार्थियों में जगाई रुचि ::
इंदौर । गणित का नाम सुनते ही जिन बच्चों के माथे पर डर की लकीरें खिंच जाती हैं, अब उसी विषय को सरल और रोचक बनाने की कोशिश स्कूल स्तर पर शुरू हुई है। श्री वैष्णव समूह के चार विद्यालयों के 50 शिक्षकों को 120 घंटे का वैदिक गणित प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के बाद इन शिक्षकों ने 5 हजार से अधिक विद्यार्थियों तक इसकी विधियां पहुंचाईं और उनमें गणित के प्रति रुचि जगाई।
प्रशिक्षण के समापन अवसर पर ओमनी वैदिक गणित संस्थान के संस्थापक एवं निदेशक रवि आसरानी ने कहा कि गणित के सूत्र और विधियां देखने में कठिन लग सकती हैं, लेकिन सही तरीके से समझने पर कठिन सवाल भी सरल हो जाते हैं। वैदिक गणित बच्चों के मन से गणित का डर और भ्रम दूर करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
राजमोहल्ला स्थित क्लॉथ मार्केट वैष्णव बाल मंदिर में आयोजित समारोह में स्वामी परमानंद योग विश्वविद्यालय के चेयरमैन डॉ. ओमानंद मुख्य अतिथि तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन एवं समन्वय से जुड़ी राज्य स्तरीय शीर्ष समिति की सदस्य शिक्षाविद् डॉ. सुनीता जोशी विशेष अतिथि थीं। वैष्णव बाल मंदिर के चेयरमैन विष्णु पसारी, एकेडमिक डायरेक्टर आभा जौहरी, प्राचार्य अंशु माहेश्वरी और सचिव विजय आगर सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे। सरस्वती-गणेश वंदना और दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ।
:: 16 सूत्र और 13 उपसूत्रों से कठिन सवाल आसान ::
आसरानी ने बताया कि वैदिक गणित 16 सूत्रों और 13 उपसूत्रों पर आधारित प्रणाली है। इसके माध्यम से अंकगणित, बीजगणित, त्रिकोणमिति, निर्देशांक ज्यामिति, क्षेत्रमिति, सांख्यिकी, सम्मिश्र संख्या, अनुक्रम-श्रेणी, सारणिक, आव्यूह और कलन जैसे विषयों को सरल तरीके से समझाया जा सकता है। 120 घंटे के प्रशिक्षण में शिक्षकों ने इन विषयों का अभ्यास किया।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल शिक्षकों की क्षमता बढ़ाना नहीं, बल्कि इस ज्ञान को विद्यार्थियों तक पहुंचाना है। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे प्रशिक्षण में मिले ज्ञान को अपने तक सीमित न रखें। गुरु से प्राप्त ज्ञान जब शिष्यों और फिर समाज तक पहुंचता है, तभी उसकी सार्थकता बढ़ती है।
:: रटने के बजाय समझकर सीखने पर जोर ::
डॉ. सुनीता जोशी ने कहा कि वैदिक गणित मानसिक स्वास्थ्य के लिए टॉनिक की तरह काम कर सकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बच्चों को रटने के बजाय समझकर सीखने पर जोर दिया जा रहा है और वैदिक गणित इस दिशा में उपयोगी हो सकता है।
मुख्य अतिथि डॉ. ओमानंद ने ध्यान, प्राणायाम और हास्यासन की क्रियाएं कराईं तथा वैदिक गणित की उपयोगिता बताई।
वैष्णव समूह के मनोज मालपानी, सुषमा मित्तल, आरती देश कुलकर्णी, ज्योति कानूनगो एवं वीणा शर्मा ने प्रशिक्षण के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण से 5 हजार से अधिक विद्यार्थियों में वैदिक गणित के प्रति उत्सुकता बढ़ी। समापन अवसर पर प्रशिक्षण पूरा करने वाले शिक्षकों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। अंत में वंदना वर्मा ने आभार माना।

