:: श्रावक संस्कार शिविर का समापन : सुधासागर महाराज के सानिध्य में 6 हजार से अधिक शिविरार्थी शामिल, 100 से ज्यादा मंचों से पुष्पवर्षा ::
इंदौर । दस दिवसीय श्रावक संस्कार शिविर के समापन पर शनिवार को दलाल बाग से राष्ट्रसंत मुनि पुंगव सुधासागर महाराज के सानिध्य में भव्य शोभायात्रा निकली। देश-विदेश से आए श्रावकों सहित करीब 10 हजार जैन समाजबंधु इसमें शामिल हुए। इनमें 6 हजार से अधिक शिविरार्थी थे। बड़ा गणपति, राजवाड़ा, सराफा और कांच मंदिर सहित शहर के प्रमुख मार्गों से निकली यात्रा का जगह-जगह स्वागत किया गया। 100 से अधिक मंचों से पुष्पवर्षा हुई और मार्गभर जयघोष गूंजते रहे।
सकल दिगंबर जैन धर्म प्रभावना समिति के तत्वावधान में निकली शोभायात्रा में रथ, घोड़ी-बग्घी, विंटेज कार और बैंड-बाजे शामिल रहे। मार्ग में आने वाले जैन मंदिरों पर दर्शन-पूजन किया गया। समाजबंधु सुबह से ही यात्रा के स्वागत के लिए मार्ग के दोनों ओर खड़े रहे। अनेक बुजुर्ग श्रावक श्वेत धोती-कुर्ता पहनकर हाथों में श्वेत पताका लिए पैदल चले।
:: 10 दिन निर्जला उपवास करने वाले श्रावक भी हुए शामिल ::
आयोजकों के अनुसार देश-विदेश से आए कई श्रावकों ने शिविर के दौरान 10 दिन तक निर्जला उपवास की तपस्या की। साधना पूरी करने के बाद वे भी शोभायात्रा में शामिल हुए।
समिति के चक्रवर्ती अध्यक्ष नवीन गोधा, सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद गोधा, मनीष गोधा, शिविर के पुण्यार्जक आकाश जैन कोयला परिवार और महामंत्री हर्ष जैन सहित पदाधिकारियों ने आयोजन की व्यवस्थाएं संभालीं। संजय पाटोदी, प्रिंसपाल टोंग्या, पिंकेश टोंग्या, सौरभ पाटोदी, अभिषेक अजमेरा, संजय सामरिया, जयदीप जैन, मनमोहन झांजरी, जेनेष झांजरी, राहुल सेठी, पारस पाटोदी, पवन पाटोदी और जितेंद्र पांड्या सहित कार्यकर्ता यात्रा मार्ग की व्यवस्थाओं में जुटे रहे।
:: सुधासागर महाराज बोले- हर अनुभव से ज्ञान और विवेक बढ़े ::
शोभायात्रा से पहले दलाल बाग में हुई धर्मसभा में सुधासागर महाराज ने ब्रह्मचर्य और आत्मिक शक्ति पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि जीवन में आने वाला प्रत्येक अनुभव साधना का माध्यम बन सकता है। महत्वपूर्ण यह है कि उस अनुभव से व्यक्ति का ज्ञान, साहस, समझ और विवेक कितना बढ़ा।
उन्होंने कहा कि भगवान, गुरु, परिवार, समाज, मित्र या विपरीत परिस्थितियां जीवन में निमित्त बन सकती हैं। उनसे कौन-सी शक्ति जागृत करनी है, यह व्यक्ति के विवेक पर निर्भर करता है। प्रत्येक अनुभव के बाद व्यक्ति को स्वयं से पूछना चाहिए कि उसकी सोच और चिंतन कितने मजबूत हुए और वह अपने बंधनों से कितना मुक्त हुआ।
धर्मसभा में प्रचार प्रमुख संजय पाटोदी ने शांतिधारा, दीप प्रज्वलन, चित्र अनावरण और पाद प्रक्षालन का लाभ लिया। जन्मदिन के अवसर पर उन्होंने सुधासागर महाराज से शुभाशीष भी प्राप्त किया।

