:: हंसदास मठ में निशुल्क अनुष्ठान, सर्वपितृ अमावस्या पर भी होगी तर्पण की व्यवस्था ::
इंदौर । हंसपीठाधीश्वर महंत स्वामी रामचरणदास महाराज ने कहा कि शास्त्रसम्मत तर्पण ऐसी प्रक्रिया है, जो व्यक्ति को ऋणमुक्त करने के साथ नई पीढ़ी को भी संस्कारित करती है। भारतीय संस्कृति की ऐसी परंपराओं को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है। बच्चों की पहली गुरु मां होती है और मां से मिले संस्कार ही जीवन को संवारते हैं।
एयरपोर्ट रोड स्थित हंसदास मठ में श्रद्धा सुमन सेवा समिति की मेजबानी में चल रहे निशुल्क तर्पण अनुष्ठान एवं पितृ मोक्षदायी भागवत में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही। ज्योतिषाचार्य पं. बच्चा महाराज ने तर्पण को सनातन संस्कृति का उजला पक्ष बताते हुए इसे नई पीढ़ी के लिए अनुकरणीय बताया। अनुष्ठान में शहीदों, स्वतंत्रता सेनानियों, होलकर राजवंश के शासकों और गोमाता के लिए भी तर्पण किया गया।
:: सर्वपितृ अमावस्या पर निशुल्क तर्पण ::
तर्पण अनुष्ठान का समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या पर सुबह 8 से 10 बजे तक होगा। जिन लोगों को दिवंगत परिजनों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है अथवा जो पूर्व निर्धारित तिथि पर तर्पण नहीं कर सके, वे हंसदास मठ में तर्पण कर सकेंगे। समिति की ओर से तर्पण सामग्री की निशुल्क व्यवस्था रहेगी।
इस अवसर पर सांसद शंकर लालवानी, ज्योतिषाचार्य पं. बच्चा महाराज और महामंडलेश्वर महंत पवनदास महाराज सहित संतों ने स्वामी रामचरणदास महाराज का शॉल, श्रीफल और प्रशस्ति पत्र भेंटकर सम्मान किया।
:: भागवत में हुआ रुक्मणी विवाह ::
पितृ मोक्षदायी भागवत में आचार्य पं. पुष्पानंदन पवन तिवारी ने रुक्मणी विवाह प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि विवाह भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण पक्ष है, जिसने समाज को मर्यादित और संस्कारित बनाए रखा है। कथा का समापन 9 अक्टूबर को सुदामा चरित्र एवं भागवत पूजन के साथ होगा।

