शांत और सुरक्षित हिंद-प्रशांत के लिए भारत-आसियान की साझा जिम्मेदारी: राजनाथ सिंह

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नई दिल्ली । केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत और आसियान देश शांतिपूर्ण, स्थिर और स्वतंत्र हिंद-प्रशांत क्षेत्र के निर्माण में समान हित साझा करते हैं। नई दिल्ली में आसियान-भारत रक्षा थिंक टैंक फोरम को संबोधित कर उन्होंने साफ किया कि भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत आसियान हमारी हिंद-प्रशांत रणनीति का केंद्रीय स्तंभ है।
हिंद महासागर और दक्षिण-पूर्व एशिया के जलक्षेत्र आपस में जुड़े होने के कारण क्षेत्र की सुरक्षा दोनों पक्षों की साझा जिम्मेदारी है। साल 2026 को आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष घोषित करने का उल्लेख कर केंद्रीय रक्षा मंत्री ने समुद्री डकैती, अवैध शिकार और आपात स्थितियों से निपटने के लिए बेहतर सूचना साझाकरण व सामूहिक क्षमता निर्माण पर जोर दिया। उन्होंने समुद्री सुरक्षा, साइबर खतरों, आपदा प्रबंधन और उभरती प्रौद्योगिकियों पर संयुक्त अनुसंधान का प्रस्ताव रखा। इसके अलावा, ड्रोन-रोधी समाधानों और आपदा प्रतिक्रिया पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का सुझाव दिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आसियान देशों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और अंतरिक्ष प्रणालियों के क्षेत्र में सहयोग के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत गश्ती पोतों, रडार और वायु रक्षा प्रणालियों के सह-विकास एवं सह-उत्पादन के लिए आसियान एक विश्वसनीय साझेदार बन सकता है। चोल और पल्लव राजवंशों के ऐतिहासिक समुद्री संबंधों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे प्राचीन सांस्कृतिक और व्यापारिक रिश्तों ने ही आधुनिक रणनीतिक साझेदारी की मजबूत नींव रखी है।