मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल में डॉक्टरों का पंजीयन नहीं होने का खुलासा
दस्तावेजों में कथित हेरफेर पर धोखाधड़ी की धाराएं बढ़ीं
अस्पताल में नियमों को ताक पर रखकर डॉक्टर कर रहे थे प्रैक्टिस
बालाघाट |. मरीज के इलाज में लापरवाही के गंभीर आरोपों से घिरे सरदार पटेल मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल की मुश्किलें अब और बढ़ती नजर आ रही हैं। हाथ के मामूली फ्रैक्चर का उपचार कराने पहुंचे विवेक तिरपुड़े को एनेस्थीसिया देने के बाद कोमा में जाने के मामले की पुलिस जांच में ऐसी अनियमितताएं सामने आई हैं, जिन्होंने अस्पताल की उपचार व्यवस्था और दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि अस्पताल में प्रैक्टिस कर रहे संबंधित डॉक्टरों का मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल में पंजीयन नहीं था। वहीं, विवेक के उपचार से जुड़े दस्तावेजों में भी हेरफेर किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस ने इस मामले में न केवल धाराएं बढ़ाई है। बल्कि संबंधित डॉक्टरों को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है।
पुलिस के अनुसार, युवक की प्रारंभिक जांच के दौरान प्रस्तुत दस्तावेज और उसके कोमा में जाने के बाद प्रस्तुत किए गए दस्तावेज अलग-अलग थे। मामले में पहले ही दो डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। अब दस्तावेजों में कथित हेरफेर के मामले में धोखाधड़ी से जुड़ी धाराएं भी बढ़ाई गई हैं। बिना पंजीयन प्रैक्टिस करने वाले अन्य डॉक्टरों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। जांच आगे बढऩे के साथ ही अस्पताल प्रबंधन की भूमिका भी पुलिस के रडार पर है।
महाराष्ट्र में पंजीयन के भरोसे मध्यप्रदेश में प्रैक्टिस
पुलिस जांच में सामने आया कि सरदार पटेल मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में प्रैक्टिस कर रहे संबंधित डॉक्टरों का महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में पंजीयन था, लेकिन मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल में उनका पंजीयन नहीं था। इसके बावजूद वे बालाघाट में मरीजों का उपचार कर रहे थे। यह तथ्य सामने आने के बाद पुलिस ने मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल से पत्राचार किया है। संबंधित डॉक्टरों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा गया है। पुलिस के मुताबिक, डॉक्टरों के जवाबों का परीक्षण किया जाएगा। जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर उन्हें भी प्रकरण में आरोपी बनाया जा सकता है। इस कार्रवाई के बाद अस्पताल में डॉक्टरों की नियुक्ति, उनके पंजीयन और मरीजों के उपचार से संबंधित नियमों के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
पहले दस्तावेज कुछ और, बाद में पेश किए गए दूसरे दस्तावेज
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर पहलू उपचार से जुड़े दस्तावेजों में कथित हेरफेर का है। एसपी आदित्य मिश्रा के अनुसार, विवेक तिरपुड़े की प्रारंभिक जांच के दौरान जो दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे, वे उसके कोमा में जाने के बाद प्रस्तुत दस्तावेजों से अलग थे। पुलिस ने इस अंतर को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल प्रबंधन की भूमिका की जांच शुरू की है। एसपी के अनुसार, दस्तावेजों में हेरफेर कर धोखाधड़ी किए जाने का मामला सामने आया है। इसी आधार पर प्रकरण में धोखाधड़ी से संबंधित धाराएं बढ़ाई गई हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि दस्तावेजों में अंतर किन परिस्थितियों में आया, इसके लिए कौन जिम्मेदार है और संबंधित लोगों की क्या भूमिका रही। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एनेस्थीसिया देने के बाद कोमा में पहुंचा युवक
विवेक तिरपुड़े हाथ के फ्रैक्चर का उपचार कराने सरदार पटेल मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल पहुंचा था। उपचार के दौरान एनेस्थीसिया दिए जाने के बाद उसकी हालत बिगड़ गई और वह कोमा में चला गया। मामूली फ्रैक्चर के उपचार के लिए पहुंचे युवक की ऐसी स्थिति होने से मामला गंभीर हो गया। घटना के बाद उपचार में लापरवाही की आशंका को लेकर जांच कराई गई। मेडिकल बोर्ड की जांच के बाद कोतवाली पुलिस ने दो डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू की थी। अब जांच के दौरान डॉक्टरों के पंजीयन और दस्तावेजों में कथित हेरफेर से जुड़े तथ्य सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई का दायरा बढ़ गया है।
पुलिस जांच के घेरे में अस्पताल प्रबंधन की भूमिका
एसपी आदित्य मिश्रा ने बताया कि संबंधित डॉक्टरों के पंजीयन के संबंध में मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल से पत्राचार किया गया है। बिना पंजीयन प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। जवाब संतोषजनक नहीं होने पर उन्हें भी आरोपी बनाया जाएगा। वहीं, उपचार से संबंधित दस्तावेजों में कथित हेरफेर के मामले में धोखाधड़ी की धाराएं बढ़ाई गई हैं। पुलिस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि दस्तावेजों में अंतर के पीछे क्या कारण थे और इस मामले में अस्पताल प्रबंधन तथा संबंधित डॉक्टरों की क्या भूमिका रही।

