(भोपाल) नेशनल लोक अदालत में करदाताओं ने कराया बड़ी संख्या में प्रकरणों का निराकरण

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समाचार लिखे जाने तक 9 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वसूल की जा चुकी है
भोपाल (ईएमएस)। नेशनल लोक अदालत में नियमानुसार सम्पत्तिकर एवं जल कर (जल उपभोक्ता प्रभार) पर लगे अधिभार में दी जा रही छूट का लाभ बड़ी संख्या में करदाताओं द्वारा उठाया जा रहा है और निगम के वार्ड/जोन कार्यालय एवं नागरिक सुविधा केन्द्रों पर प्रकरणों का निराकरण कराने वालों का तांता दिन भर से लगा हुआ है और समाचार लिखे जाने तक सम्पत्तिकर, जल उपभोक्ता प्रभार आदि के 6728 प्रकरणों का निराकरण किया जाकर 09 करोड़ रूपये से अधिक की राशि वसूल की जा चुकी है। प्रकरणों का निराकरण कराने वाले करदाताओं का निगम कार्यालयों में आने का क्रम अभी भी जारी है। निगम आयुक्त अविनाश लवानिया सहित निगम के अपर आयुक्तगण/उपायुक्तगण व अधिकारियों ने शहर के विभिन्न जोन एवं वार्ड कार्यालयों में जाकर निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आवश्यक निर्देश दिये।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव द्वारा मध्यप्रदेश में नेशनल लोक अदालत आयोजित किए जाने के निर्देशों के परिपालन में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आदेश में निहित निर्देशों अनुसार नगर निगम भोपाल द्वारा शनिवार को अपने सभी वार्ड/जोन कार्यालयों व नागरिक सुविधा केन्द्रों में नेशनल लोक अदालत शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों में राज्य शासन द्वारा निर्धारित शर्तों के अधीन अधिभार (सरचार्ज) में छूट प्रदान की जाकर सम्पत्तिकर के ऐसे प्रकरण जिनमें कर एवं अधिभार की राशि 50 हजार रुपये बकाया थी उन्हें मात्र अधिभार में 100 प्रतिशत की छूट देकर निरा.त किया गया जबकि 50 हजार से अधिक एवं 1 लाख रुपये तक बकाया राशि पर केवल अधिभार में 50 प्रतिशत तक की छूट एवं 1 लाख रुपये से अधिक की राशि बकाया होने पर मात्र अधिभार में 25 प्रतिशत की छूट प्रदान की गई।
इसी प्रकार जलकर के प्रकरणों में अधिभार सहित 10 हजार रूपये तक की बकाया राशि पर अधिभार में 100 प्रतिशत छूट दी जा रही है जबकि 10 हजार रूपये से अधिक 50 हजार रूपये तक की अधिभार सहित बकाया राशि पर अधिभार में 75 प्रतिशत तथा अधिभार सहित 50 हजार रूपये से अधिक की बकाया जलकर की राशि पर मात्र अधिभार में 50 प्रतिशत की छूट दी जाकर प्रकरणों का निराकरण किया। उपरोक्त छूट केवल नेशनल लोक अदालत के आयोजन दिनांक को मात्र एक बार दी गई है।
हरि प्रसाद पाल / 08 दिसम्बर, 2018

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