वह ग़रीब था ; इसलिए – बदनसीब था । यूं तो खैर था । पर –…
Category: काव्य ग़ज़ल
A Different Existence
Had tiny eyes and crooked fingers This is from when the world was asleep for me…
अहिल्या के अनुत्तरित प्रश्न
हे राम ! बताओ मुझको….. सदियों तक मैं क्यों पाषाण रही ? था कैसा पाप?जिससे मैं…
ज़ुबां से नहीं आंखों से कह गया कोई ,
ज़ख्मे दिल मुझको ये दे गया कोई , दिल से न जाने क्या कह गया कोई, …