तुम्हारे जैसे आशिक कितने होंगे?
गिन गिन कर लाओ..
उनके प्रेम का प्रमाण
तेजाब से लिखवाओ।
मेरे इंकार को मैं इकरार बना दूं
मेरे फूंके हुए चेहरे को
एक बार तो अपनाओ!!
तू देख इन आंखों को
गहरे काले गड्ढे…
सुंदर सुंदर सपनों का
एक बार उजड़ा सा लगता है
खाक चेहरे पर ना जश्न मना
तू पूरा शमशान सा लगता है।
मैं नारी हूं , सह जाऊंगी,
तुझे एक ‘ना’ नें हिला दिया!?
तू मर्द बड़ा ही बनता है
तेजाब नारी को पिला दिया!?
अब बांधो यह सामान तुम्हारा
अब आने वाली तेरी बारी है
लेकर खड़ा है तेजाब कोई
निशाने पर कोई तुम्हारी है।
सच्चे आशिक का दम भरते थे न!
शहनाई की धुन ना सहन कर सके
चलो मंडप में एक कुंड,
तेजाब की बनवाते हैं
साथ में तेरे संग बस
एक डुबकी लगाते हैं
पहले जलेगी इंकार मेरी
फिर तुम्हारा अहंकार होगा
दमन चक्र का फिर अंत होगा
फिर कहीं किसी का
तू सहचर्य होगा।
रजनी उपाध्याय
अनूपपुर मध्य प्रदेश