ऐ चांद ! मत तड़पाना

ऐ  चांद !  मत  तड़पाना , जल्दी  से  तू  आना ,

जलधर  संग  खेल – खेल  में , कहीं  भूल  न  जाना ।

वसुधा  पर  व्रत  करके  गोरियां , खाई  नहीं  है  खाना ,

देरी  यदि  लगाएगा  तो , देंगी  हजार  ताना ।

कातिलाना  लगे  तेरा  यूं , तिरछे  से  मुस्कुराना ,

आज  रात  ओ  छलिया  तू , नजरें  ना  चुराना ।

छिपकर  पयोधर  के  पीछे ,  नखरे  ना  दिखलाना ,

लुका – छुपी  का  खेल , किसी  और  रात  दिखाना ।

भूखी – प्यासी  सखियों  को , अच्छा  नहीं  तरसाना ,

तेरी  चांदनी  में  पिया  को  देखे , आभा  तू  बिखराना ।

पूरी  करना  सबकी  मुरादें , ख्वाहिशों  को  सजाना ,

” रहे  सलामत  सबके  सजना ”  ये  वर  देकर  जाना ।

जन्मों – जन्मों  के  बंधन  को , हर  जन्म  है  निभाना ,

गोरी – साजन  के सुख – दुख  का  सच्चा  साथी  बन  जाना ।

दूर  उदासी  को  करना , देना  खुशियों  का  खजाना ,

ऐ  चांद ! मत  तड़पाना , जल्दी  से  तू  आना ।

नेहा चितलांगिया

मालदा

पश्चिम बंगाल