। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. शिवप्रकाश जोशी ने दीपावली मोहरत के बारे में जानकारी दी है शुभ मोहरत में कार्य करने से सभी के लिये यह दीपावली शुभ संकेत लेकर आएगी।
गुरू पुष्य नक्षत्र योग 28.10.2021 गुरूवार 767 वर्ष में गुरू शनि की युक्ति में आया है। जिसमें सोना, चांदी, धातु, कपड़ा, मकान, दुकान, संस्थान मुहूर्त समय प्रातः 10.30 से दोप. 3 चल लाभ अमृत, सायं 04.30 से रात्रि 9 बजे तक श्रेष्ठ माना गया है। जिसमें खरीदारी, मकान, दुकान, संस्थान का मुहूर्त करना श्रेष्ठ रहेगा।
दूसरा मुहूर्त धनतेरस पर कुबेर पूजा एवं आयुर्वेद के जनक ऋषि धन्वन्तरि की पूजा मुहूर्त दिनांक 03.11.2021, बुधवार जिसमें विशेषकर धातु, चांदी, तांबा, पीतल, सोना, वस्त्र क्रय करना विशेष शुभ माना गया है। साथ ही सगाई, दस्तुर, दुकान, संस्थान आदि का मुहूर्त भी करना श्रेष्ठ माना गया है।
03.11.2021 को ही चतुदर्शी का मुहूर्त भी है। यम चतुर्दशी, नरक चतुर्दशी और रूप चतुर्दशी का यह दिन विशेष महत्व का है। प्रातः धन कुबेर की पूजा एवं धनवन्तरी पूजा प्रातः 6 से 9 लाभ अमृत चोघड़िया, प्रातः 10.30 से 12 शुभ का चौघड़िया खरीददारी के लिये शुभ है। सायं 7.30 से वृषभ लग्न में दीपदान, यम पूजा तथा शाम को नदी, तालाब में दीप रखकर टाटियां विसर्जन करना विशेष शुभ माना गया है। जिससे यम के द्वारा यातना का दोष नहीं रहता है तथा घर में सुख-शान्ति रहती है।
शुभ दीपावली संवत् 2078 साके 1943 सन् 2021 गुरूवार 04.11.2021 कार्तिक मास कृष्ण पक्ष को दीपावली का महोत्सव मनाया जायेगा। इसमें प्रातः 6 से 7.30 शुभ का चौघड़िया दुकान, संस्थान, मकान, खेत, मील, कारखानों सभी स्थानों पर गौमूत्र से स्थान पवित्र करे। लाल गेरू, मिट्टी व गोबर से लिपाई करे। गादी बिछाने का समय तथा लक्ष्मीजी की तस्वीर व मूर्ति विराजमान करने का समय प्रातः 10.30 से दोप. 3 बजे चल, लाभ, अमृत का चौघड़िया रहेगा। इन चौघड़ियों में दुकान, संस्थान, मिल, कारखाने, शासकीय व अर्द्धशासकीय भवन आदि में विद्युत साज सज्जा के साथ पूजा विधान करना विशेष शुभ माना गया है। लक्ष्मी पूजा में सामग्री नारियल, कमल के फूल, गुलाब गेंदा के फूल, पूजा सामग्री पंच मेवा, मिश्री, अबीर गुलाल, कंकू, पंचामृत, कमल गट्टा, हार, फूल प्रसाद, गोमत्री चक्र, कुबेर यंत्र, अष्ट लक्ष्मी यंत्र, इंत्र, अगरबत्ती और 101 दीपों से वंदनवार सजाकर पूजा विधान सम्पन्न करे।
शाम के समय 4.30 से 9 तक शुभ, अमृत व चल के चौघड़िया है इसमें भी विशेषकर वृषभ लग्न का समय 6.23 से 8.21 है जो अतिश्रेष्ठ समय माना गया है। इसके साथ ही रात्रि में सिंह लग्न का समय है 11.58 से 3.11 है। सिंह लग्न में पूजा करने से धन की देवी लक्ष्मी विशेष प्रसन्न होती है। धन की बरसात होती है, वैभव व्यापार बढ़ता है। रोगों से मुक्ति मिलती है। व्यापार व्यवसाय श्रेष्ठ चलता है।
इस वर्ष की विशेष भविष्यवाणी- व्यापार में चांदी, सोना, तांबा, पीतल, घी, तेल, तेलवाना, लहसन, असालिया, रायड़ा, तारामिरा, असगंध, सफेद मूसली और पोस्ता विशेष तेज रहेगा। रबि की फसल गेहूं, चना, अफीम, रायड़ा, असालिया, तारामिरा, सफेद मूसली आदि श्रेष्ठ होगी। वर्ष में दो बार भूकंप, ज्वार भाटा, हिमपात विशेषकर उत्तर दक्षिण भारत में होंगे तथा पाकिस्तान, जापान, चीन, आस्ट्रेलिया, कनाडा आदि देश विशेष प्रभावित होंगे। राजनीतिक उथल फुतल तेज होगी व कई जगह सत्ता परिवर्तन होंगे। भारत में महामारी का अंत होगा परन्तु सावधानी आवश्यक है। दीपावली का यह पर्व सारे देश व और विश्व के लिये धनधान्य, सुख सम्पदा तथा सबके लिये उत्तम स्वास्थ्य की शुभकामनाओं के सहित विशेष बधाई।
पं. शिवप्रकाश जोशी
ज्योतिषाचार्य
मो.नं. 9406602214