दिनेश वंश मंडन,
लोकाभिराम आये हैं
अवध में राम आये हैं
धन्य धरा सरयू तट की,
बड़भागी परम पुनिता,
राम जहाँ महाराजा हैं,
महारानी है जहाँ सीता
रघुकुल तिलक सकल
सुखदायक परम
सुजान आये हैं,
अवध में राम आये हैं,
अरसों से जिस आस में
नयन बरसों बरसे हैं खरारि,
प्यास मिटेंगे अब सारे,
मृदु मूरत सूरत निहारी
आरत हृदय में जागृत,
प्राणन के प्राण आये हैं
अवध में राम आये हैं,
आये हैं अब दुखभंजन,
जन मन रंजन प्रतिपालक,
विशुद्ध बोध विग्रह हैं,
आये दनुज कुल घालक,
गो,द्विज,धेनु देव हितकारी,
सकल सुखधाम आये हैं
अवध में राम आये हैं
करने अति,अधम मती पावन
मनभावन हैं पधारे,
अवध में हम या हममें अवध,
ये समझे बस वही न्यारे,
तीनों लोक के स्वामी,
भारत के ललाम आये हैं
अवध में राम आये हैं
काश पुन: वो,मास दिवस का
दिवस एक रवि करते,
हम नयनों का होना सफल कर,
पल पल हिय में भरते,
आये हैं जग में या,
स्वयं जगत कल्याण आये हैं
अवध में राम आये हैं
क्षमा शुक्ला,
औरंगाबाद-बिहार