जहां-जहां चुनाव होने हैं, वहां-वहां पॉलीटिकल टूरिस्ट बहुत ज्यादा घूमते हैं। एक से दूसरी पार्टी और तीसरी से पांचवी पार्टी में भ्रमण करने वाले टूरिस्टों का जमावड़ा लग रहा है। आयाराम, गयाराम और आ-गयाआराम की राजनीति अपने पंख फड़फड़ा रही है। चुनावी मामला त्रिकोण, चतुष्कोण से लेकर बहुकोण तक हुआ जा रहा है। बेचारा मतदाता जाने कौन से कोण में कब फंस जाए, उस भोले जंतु को यह पता ही नहीं पड़ता है। हर एक पार्टी में स्तीफों का दौर चल रहा है। हर नेता की एक जेब में इस्तीफा पड़ा है और दूसरी जेब में किसी दूसरे दल-दल का दुपट्टा! एक दूसरे की पार्टी को झटका मारने के अखिल भारतीय कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है। टूरिस्ट नेतागण अपने सूटकेस जमा चुके हैं। उन्होंने दूसरे दल-दल में धंसने के लिए बाकायदा कीचड़ का स्वयं इंतजाम कर लिया है। वे ढेर सारा कीचड़ अपने साथ ला रहे हैं। कीचड़ी आत्मनिर्भरता! कब गालियां ठोकनी है और कब तालियां मारनी है। इसकी जमाखोरी कर ली है। वे बाहर खड़ी बसों का इंतजार कर रहे हैं।
कई बसें खड़ी हैं। आड़ी-मेड़ी, तिरछी-टेड़ी! अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के टूरिस्ट बसों में बैठने के लिए लालायित हो रहे हैं। चुनावों के यही कायदे होते हैं। जहां-जहां टूरिस्ट जाते हैं, वहां-वहां स्थानीय जनता को मीठे लॉलीपॉप पकड़ाते हैं। विधानसभा चुनाव में तो टूरिस्टों का मामला बहुत तेजी से बढ़ गया है। ऐसे टूरिस्ट अपनी-अपनी पार्टियों के अधिवेशन को लात मारकर दूसरों की पार्टियों में दुपट्टे-तिपट्टे पहनने के लिए अपने गले के नाप देते फिर रहे हैं। कार्यकर्ताओं को तो बस दरियां झटकना और भौंपू बजाना मात्र है। ये टूरिस्ट कुम्हारिया से लेकर जामोला तक पसरे पड़े हैं। कुम्हारिया गांव है जोरदार! वहां राजनीतिक टूरिस्टों की इतनी घचाघची मची है कि अच्छे-अच्छे खांटी राजनीतिज्ञ भी भरी सर्दी में ठंडे-ठंडे वादों से भरी आइसक्रीम बेचते नजर आते हैं। राजनीति के पुरातत्व विभाग में कई पार्टियां सिकुड़ी पड़ी है। कई पार्टियां अपने नेताओं के स्मारकों पर टूरिस्टों की लंबी-लंबी लाइनें लगाकर टिकटों पर भारी इन्कम कर रही है। ये पर्यटक 5 साल में एक बार आते हैं। बहुत झक-झक मचाते हैं और फिर गधे के सींग से गायब हो जाते हैं।
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि विधानसभा चुनाव के दौरान तो इनकी आमद बहुत ज्यादा हो जाती है। इस मौसम में इनकी आवाजाही इतनी बढ़ जाती है की कई मान्यता प्राप्त कुत्तों को भी अपनी निजी दुम दबाकर अपनी मौलिक गली में छुपना पड़ जाता है। इन पॉलिटिकल पर्यटकों का रुझान देखते ही बनता है। दल-दल पार्टी, दल-बदल पार्टी, गंदलादल पार्टी, बदलादल पार्टी आदि घनघोर भयंकर दलिद्दर सी पार्टियों के 155535 पर्यटकों ने इस बार उपस्थिति दर्ज कराई है। इनमें से कई पर्यटक तो ऐसे हैं, जो कई सालों से जेल में भी रह रहे हैं। वे जेल से छूटते ही अपने वादे, घोषणाएं, चुनावी हथकंडे आदि सूटकेस में जमा कर, चुनावी व्यवस्था में कानून को धता बताते हुए पॉलीटिकल टूरिज्म के लिए निकल जाते हैं। ऐसे टूरिस्ट ही राजनीति का सुनहरा भविष्य हैं। इनका खुद का भविष्य भी बहुत उज्जवल है। सभी शीर्ष नेतृत्व, आलाकमान, दल मुखिया आदि जंतु भी इन टूरिस्टों के आने पर उनकी पूजा पाठ करने के लिए सारे ढोल-नगाड़े बजाने के लिए तत्पर हैं।
— रामविलास जांगिड़,18, उत्तम नगर, घूघरा, अजमेर (305023) राजस्थान