दिल में दर्द उभर कर आया देखा उनकी यादें हैं।
कुछ मनुहार मनोहर उनके कुछ मेरी फरियादें है।
पढ़ा हर्फ़ हर जो भी मैंने उनके ही संदेश रहे।
उनकी कुछ ना जिम्मेदारी मेरे प्रति उपदेश रहे।
ठगने को सौ लाख बहाने और कुछ झूठे वादे हैं…..।
काश! मुझे कुछ चालें आतीं जिनको हम भी चल पाते।
क़ोई सुनने वाला होता दर्द जिसे हम दिखलाते।
प्यार के राही हम हैं विरही बिल्कुल सीधे-सादे हैं…..।
हमको भी सिखला देते कुछ दुनिया जैसा बन पाते।
दिल में रखते चाहे जो भी झूठा प्यार भी दिखलाते।
देखा कड़ी परीक्षा करके वैसा ना कर पाते हैं….।
वीरेन्द्र कुमार मिश्र ‘विरही’
गोरखपुर,8808580804