सकारात्मक सोच की कहानियां : ‘दादू का पिटारा’
भारत में आरंभिक बाल कथा साहित्य के रूप में पंचतंत्र, कथासरित्सागर, सिंहासन बत्तीसी, बैताल पच्चीसी, अलिफ़लैला आदि की कहानियां प्रचलित थी। इन्हें आज भी एक पाठक वर्ग बहुतायत से पढ़ता है। आधुनिक काल में बाल कथा साहित्य के इस पूरे परिदृश्य में काफी बदलाव आया है और यह बदलाव नित नए- नए रूप में सामने आ रहा है, जिसमें बाल कहानी, उपन्यास, विज्ञान कथाएं, नाटक, एकांकी, रिपोर्ताज़, पत्र लेखन, पहेलियां आदि कई विधाएं प्रमुख हैं।
हाल के दिनों में कुछ ऐसी बाल कहानियां लिखी गई है जो बालमन में पनप रही आज की जिज्ञासाओं से सीधे टकराती हैं। हमारी परम्पराएं, संस्कार, तीज- त्यौहार, हमारा ग्रामीण परिवेश, हमारी संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण, रिश्तों का सम्मान, हमारी तकनीकी, हमारा वैज्ञानीक दृष्टिकोण एवं स्वास्थ्य भी कहानियों में प्रतिबिंबित हो रहा है। कहानियों के माध्यम से आधुनिक सोच को बच्चों तक पहुँचाने की कोशिश की जा रही है। बदलते हुए समाज, युगबोध और जीवन मूल्यों को देखते हुए ऐसी बाल कहानियां लिखी जा रही हैं जिनसे भावी पीढ़ी में वैज्ञानिक सोच के साथ ज्ञान व संस्कारों का बीजा रोपण हो। ‘दादू का पिटारा’ एक ऐसा ही कहानी संकलन है जिसमें बालक की बाल सुलभ क्रियाओं, रोजमर्रा की चुनौतियों, जिज्ञासाओं और समाधान को कहानियों का मूलभाव बनाया गया है। इन कहानियों के लेखक श्री गोकुल सोनी हैं।
भोपाल निवासी वरिष्ठ साहित्यकार श्री गोकुल सोनी किसी परिचय के मोहताज़ नहीं हैं। चालीस से भी अधिक वर्ष से आप विभिन्न विधाओं में लेखन में सक्रिय हैं। आपकी 12 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।आप कई प्रमुख पत्रिकाओं के संपादन से भी जुड़े रहे हैं। प्रतिष्टित संस्थाओं द्वारा लगभग 40 सम्मान आपको प्राप्त हो चुके हैं। आकाशवाणी व दूरदर्शन पर आपकी रचनाओं का प्रसारण, एवं देश की पत्र – पत्रिकाओं में रचनाएं अनवरत प्रकाशन हो रहा है।आप कई महत्वपूर्ण साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी रहते हुए साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक गतिविधियों के उन्नयन में सहभागी रहे हैं। श्रीगोकुल सोनी जी एक सफल मंचीय कवि व संचालक रूप में खासे लोकप्रिय हैं।
आपके बाल कहानी संग्रह ‘दादू का पिटारा’ में पच्चीस बेहतरीन कहानियां संग्रहित हैं। संग्रह की शुरुआती कहानियां ‘अन्वय और जूते’, ‘अन्वय का साबुन प्रेम’, ‘अन्वय और सांप’, ‘अन्वय मंदिर में’ बड़ी मजेदार कहानियां हैं जिसमें अन्वय की मासूमियत सबका दिल जीत लेती है, पर कभी- कभी अपनी बाल सुलभ हरकतों से हंसी का पात्र भी बनता है। समझाने पर समझ भी जाता है। ‘अर्जुन और केंचुआ में’ केंचुए के महत्व के बारे में बताया गया है कि कैसे केंचुए हमारे दोस्त होते हैं, क्योंकि ये जमीन को खोखली बनाते हैं जिससे पौधों को हवा मिलती है और बिल खोदकर ये जो मिट्टी निकालते हैं वह खाद का काम करती है एवं पौधों को पोषण देती है। ‘जंगल का रहस्य’ कहानी के माध्यम से जहां कई तरह की जानकारियां देने का प्रयास हुआ है वहीं बाँधवी ने लोगों के मन से अन्धविश्वास को दूर कर दिया था। ‘जन्म दिन’ एक बेसहारा व्यक्ति गप्पू को जन्मदिन के बहाने खुशियां प्रदान करने की प्रेरक कहानी है। बच्चों द्वारा सुखी बंजर पहाड़ी पर गुलेल द्वारा बीज फैंकने की सुंदर प्रेरक कहानी है -‘कुछ दिनों बाद जब बारिश होगी और बच्चों द्वारा पहाड़ी पर फैंके बीज उग कर पौधे और फिर पेड़ बन जाएंगे तो पहाड़ी कितनी हरि- भरी और सुंदर लगेगी। बच्चों को पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा प्रदान करती सुंदर कहानी है- ‘गुलेल’। ड्रोन द्वारा क्या क्या काम किये जा सकते हैं। इसकी ट्रेनिंग कहाँ ली जा सकती है। इसके लिए क्या योग्यता होनी चाहिए? ड्रोन का उत्पादन कहाँ होता है आदि जानकारी कहानी ‘ड्रोन दीदी’ में देने का प्रयास सफलता से हुआ है। ‘खुश रहना है तो बचत करो’ कहानी के माध्यम से बताया गया है कि बेकार की चीजें खाकर स्वास्थ्य खराब करने की बजाए पैसे बचाएंगे तो जीवन में काम आएंगे। इसमें स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के साथ ही बचत की प्रेरणा भी दी गई है। जुगनुओं के बारे में बताती बेहतरीन कहानी है- ‘गुमशुदा तारे’। संग्रह की एक और कहानी ‘सावधानी हटी, दुर्घटना’ घटी’ साइबर फ्राड से बचे रहने के बारे में समझाती है। ‘मकर सक्रांति’ कहानी हमारी सांस्कृतिक विरासत व परम्पराओं की जानकारी देती है। संग्रह की अन्य कहानियां ‘नाई की कहानी’, ‘जादूगर का जादू’, चलो गांव की ओर’, ‘जीत का दुःख’, ‘सफेद झूठ’, ‘विरासत की शक्ति’, ‘पुंगनुर गाय’, ‘लालच की सजा’ भी बेहतरीन, प्रेरक कहानियां हैं। बालक अन्वय की कहानियों में बाल-सुलभ चंचलता और सीख, ‘अर्जुन और केंचुआ’ व ‘गुलेल’ में पर्यावरण संरक्षण, ‘ड्रोन दीदी’ में विज्ञान-तकनीक, ‘गुमशुदा तारे’ में प्रकृति, ‘सावधानी हटी…’ में साइबर जागरूकता, ‘मकर सक्रांति’ में संस्कृति-परंपरा – हर कहानी मनोरंजन के साथ नैतिक शिक्षा, स्वास्थ्य, बचत, ग्रामीण जीवन और अंधविश्वास के विरुद्ध चेतना देती है। ‘जन्म दिन’ और ‘जीत का दुःख’ जैसी कहानियाँ संवेदना जगाती हैं। सरल, सहज और बालमन के अनुकूल। उपदेश नहीं, उदाहरण से सीख।
‘दादू का पिटारा’ विज्ञान, संस्कार, पर्यावरण और संस्कृति को एक साथ पिरोता संग्रह है। यह बच्चों को सोचने, हंसने और बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है। बाल पाठकों के साथ-साथ अभिभावकों और शिक्षकों के लिए भी उपयोगी। वरिष्ठ साहित्यकार श्री गोकुल सोनी का यह बाल कहानी संग्रह समकालीन बालमन की जिज्ञासाओं, संस्कारों और वैज्ञानिक सोच को एक साथ छूता है। कह सकते हैं कि ‘दादू का पिटारा’ बाल कहानी संग्रह के माध्यम से श्री गोकुल सोनी ने विज्ञान, संस्कार, स्वास्थ्य, ग्रामीण परिवेश, संस्कृति, परम्पराएं, पर्यावरण संरक्षण, को अपनी कहानियों का विषय बनाया है जो बाल पाठकों को पसंद आएगा और उन्हें प्रेरित करेगा । यह बाल कहानी संग्रह बच्चों की मासूमियत और जिज्ञासा को केंद्र में रखकर लिखा गया है। लेखक ने उपदेश के बिना, कहानी के माध्यम से ग्रामीण जीवन, परंपरा, पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नैतिक मूल्यों का बीजारोपण किया है। भाषा सरल, सहज और बालकों के लिए बोधगम्य है। कहानियों के साथ सुंदर चित्र भी दिए गए हैं। मुख पृष्ठ आकर्षक हेंन। ‘दादू का पिटारा’ मनोरंजन के साथ शिक्षा देने वाला संग्रह है। यह बच्चों में संस्कार, जिज्ञासा और सकारात्मक सोच जगाता है। आधुनिक समय की माँग के अनुरूप यह पुस्तक बाल पाठकों के साथ अभिभावकों-शिक्षकों के लिए भी संग्रहणीय है। बाल साहित्य जगत में इस पुस्तक को पूरा सम्मान मिलेगा यह आशा की जानी चाहिए। इस सुंदर, प्रेरक, उपयोगी पुस्तक के लिए लेखक ब व प्रकाशक को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!
राजकुमार जैन राजन

