वित्त वर्ष 2028 तक पॉलिमर नोटों का लक्ष्य: आरबीआई गवर्नर

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मुंबई । भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) वित्त वर्ष 2027-28 तक पॉलिमर करेंसी नोटों को आम प्रचलन में लाने की दिशा में काम कर रहा है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मुंबई में हुई मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन नए नोटों की गुणवत्ता और प्रदर्शन का व्यापक आकलन करने के लिए फिलहाल देश भर में फील्ड ट्रायल जारी हैं। गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि पॉलिमर बैंक नोटों का पायलट कार्यक्रम सक्रिय रूप से चल रहा है। केंद्रीय बैंक इन्हें बड़े पैमाने पर जारी करने से पहले गहन परीक्षण सुनिश्चित करेगा, ताकि यह सत्यापित हो सके कि ये नोट भारतीय परिस्थितियों में टिकाऊ और प्रभावी साबित हों। उनका जोर दे रहा कि फील्ड ट्रायल के विस्तृत मूल्यांकन के बाद ही इन नोटों को बड़े पैमाने पर चलन में लाने पर अंतिम निर्णय होगा। इस पहल को केंद्र सरकार का समर्थन भी मिल चुका है। हाल ही में, वित्त मंत्रालय ने संसद को सूचित किया था कि उसने आरबीआई के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है जिसके तहत 10 रुपये और 20 रुपये मूल्यवर्ग के पॉलिमर नोटों का फील्ड ट्रायल होना है। इस पायलट परियोजना के तहत, आरबीआई दोनों मूल्यवर्ग के एक-एक अरब (कुल 2 अरब) पॉलिमर नोट जारी करने की योजना बना रहा है, जिनका उद्देश्य उनकी मजबूती, टिकाऊपन और भारतीय मौसम एवं उपयोग की विशिष्ट परिस्थितियों में उनकी उपयुक्तता का परीक्षण करना है।
आरबीआई का मानना है कि पॉलिमर बैंक नोट पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में कहीं अधिक टिकाऊ होते हैं, खासकर छोटे मूल्यवर्ग के नोटों के लिए जो सबसे अधिक इस्तेमाल होते हैं और जल्दी खराब होते हैं। इससे नोटों को बार-बार बदलने की लागत में भी काफी कमी आएगी। इसके अतिरिक्त, पॉलिमर नोट आधुनिक और उन्नत सुरक्षा फीचर्स जैसे पारदर्शी विंडो और जालसाजी को रोकने वाले अत्याधुनिक तत्वों से लैस हो सकते हैं। हालांकि, केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कागजी मुद्रा को पूरी तरह से हटाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। यदि पॉलिमर नोट जारी किए जाते हैं, तब वे मौजूदा कागजी नोटों के साथ ही प्रचलन में रहने वाले है। आरबीआई विभिन्न जलवायु और उपयोग की परिस्थितियों में इन नोटों के प्रदर्शन की समीक्षा के आधार पर ही इनके व्यापक इस्तेमाल पर अंतिम फैसला लेगा।